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Road Accident के समय PM Rahat योजना से किस तरह चिंतामुक्त इलाज करवा सकते हैं?

क्या आप जानते हैं कि किसी भी प्रकार की सड़क दुर्घटना यानी रोड एक्सीडेंट में आपको डेढ़ लाख तक का मुफ्त, कैशलेस इलाज मिल सकता है। NHAI ने योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना के 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी।

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पीएम राहत योजना के तहत 1.5 लाख तक का इलाज मुफ्त

क्या आप जानते हैं कि साल 2024 में देशभर में 4 लाख, 87 हजार, 705 सड़क हादसे (Road Accident) हुए थे। इनमें से 1 लाख, 77 हजार, 177 लोगों ने रोड एक्सीडेंट में अपनी जान गंवा दी। 2025 के आंकड़े हमें अभी तक नहीं मिले हैं। लेकिन 2020 से 2024 तक के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि रोड एक्सीडेंट के मामले भी लगातार बढ़े हैं और हादसे में मृतकों के आंकड़ों में भी अच्छा-खासा इजाफा हुआ है। किसी भी सड़क हादसे में पहला एक घंटा जिसे गोल्डन आवर भी कहा जाता है, बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस गोल्डन आवर में अगर पीड़ित को इलाज मिल जाए तो एक आंकड़े के अनुसार 50 फीसद लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है। इसी गोल्डन आवर को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हॉस्पिटलाइजेशन एंड अश्योर्ड ट्रीटमेंट (PM RAHAT) योजना शुरू की गई है। चलिए जानते हैं यह स्कीम क्या है? कैसे काम करती है? और सबसे जरूरी बात ये कि कोई सड़क हादसे का पीड़ित व्यक्ति इसका लाभ कैसे उठा सकता है?

PM-RAHAT के जरिए सड़क दुर्घटनाओं में समय पर मेडिकल हेल्प अप और भी अधिक सुलभ हो गई है। NHAI ने PM-RAHAT योजना के तहत दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर में पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

PM-RAHAT योजना से क्या लाभ मिलेगा?

PM-RAHAT के अनुसार मोटर वाहन से संबंधित किसी भी रोड एक्सीडेंट के शिकार व्यक्तियों को 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध होगा। गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार (Stabilization Treatment) सुनिश्चित किया जाएगा। योजना मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 के अनुरूप लागू की गई है।

सड़क दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा होता है गोल्डन आवर

सड़क दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा होता है गोल्डन आवर

बिना आर्थिक समस्या के मिलेगा इलाज

NHAI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पहल पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं, इंश्योरेंस कंपनियों और सड़क परिवहन विभाग को एक पूर्णतः डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ती है। इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) के एकीकरण से अस्पतालों को तुरंत भुगतान और पीड़ितों को बिना आर्थिक समस्या के तत्काल इलाज मिल सकेगा।

पिछले कुछ सालों में हुए सड़क हादसों का आंकड़ा

भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। बाद साल दर साल सड़क हादसों की करें तो साल 2020 में 3 लाख,72 हजार,181 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 1 लाख, 38 हजार, 383 लोगों की मौत हो गई थी। साल 2021 में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ बढ़कर 4 लाख,12 हजार, 432 पहुंच गया,जिसमें 1 लाख, 53 हजार, 972 लोग मारे गए। साल 2022 में कुल 461312 सड़क हादसे हुए और इन हादसों में 1 लाख,68 हजार, 491 लोग अपनी जान गंवा बैठे। 2023 में कुल 480583 रोड एक्सीडेंट हुए, जिनमें 1 लाख, 72 हजार, 890 लोगों की मौत हो गई। 2024 में 4 लाख, 87 हजार, 705 सड़क हादसे हुए और इनमें 1 लाख, 77 हजार, 177 लोगों की जान चली गई।

2020 से 2024 तक देशभर में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा

2020 से 2024 तक देशभर में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा

विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्डन आवर (दुर्घटना के पहले घंटे) में सही इलाज मिलने से 50 फीसद मौतों को रोका जा सकता है। PM-RAHAT इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर शुरू किया गया अभियान है, जिसमें किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना शामिल है।

2020 से 2024 के बीच रोड एक्सीडेंट में जान गंवाने वालों का आंकड़ा

2020 से 2024 के बीच रोड एक्सीडेंट में जान गंवाने वालों का आंकड़ा

NHAI की लोगों से अपील

योजना का उद्देश्य सिर्फ मेडिकल हेल्प देना ही नहीं, बल्कि पीड़ित और उनके परिवार से आर्थिक बोझ को कम करके हर जीवन को बचाना है। NHAI ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें। यह कदम सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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