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AI Stocks का बबल फटना तय! क्यों रे डालियो ने दी बड़े ग्लोबल क्रैश की चेतावनी?

मशहूर अमेरिकी निवेशक और हेज फंड मैनेजर रे डालियो का दावा है कि फिलहाल ग्लोबल इक्विटी मार्केट AI Stocks Bubble में है। पिछले किसी भी बबल की तरह इसका फटना भी तय है।

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रे डालियो ने दी बड़ी चेतावनी

Ray Dalio on AI Stocks Bubble : AI को लेकर दुनियाभर में जिस तेजी से निवेश बढ़ा है, उसे लेकर मशहूर निवेशक व हेज फंड मैनेजर Ray Dalio ने शेयर बाजार में बन रहे संभावित बबल को लेकर चेतावनी दी है। Bridgewater Associates के संस्थापक डालियो का कहना है कि इतिहास में लगभग हर बड़ी टेक्नोलॉजी से जुड़ा निवेश पहले एक बबल में बदला और बाद में उसमें तेज गिरावट आई।

डालियो का कहना है कि रेलवे से लेकर औद्योगिक क्रांति और 1920 के दशक के आखिर की टेक्नोलॉजी तेजी तक, एक पैटर्न बार-बार देखने को मिला है। नई तकनीक वास्तव में दुनिया बदल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उससे जुड़े शेयर किसी भी कीमत पर अच्छे निवेश बन जाते हैं। डालियो ने कहा, “लगभग हर टेक्नोलॉजी के बूम के साथ बाजार में एक बबल बना और फिर बबल फटा।”

चमत्कार और निवेश में फर्क समझना जरूरी

Ray Dalio ने निवेशकों को आंखें बंद करके AI Stocks में निवेश करने को लेकर चेताते हुए कहा कि निवेशकों को टेक्नोलॉजी की क्षमता और शेयर की कीमत के बीच अंतर समझना चाहिए। डालियो के मुताबिक असली खतरा तब पैदा होता है, जब लोग किसी टेक्नोलॉजी की उपलब्धि को उसके शेयर में निवेश के बराबर मान लेते हैं। उनके मुताबिक कोई तकनीक बेहद परिवर्तनकारी हो सकती है, लेकिन अगर उससे जुड़ी कंपनियों के शेयर बहुत ज्यादा कीमत पर खरीदे जा रहे हों या निवेश कर्ज लेकर किया जा रहा हो, तो बाजार में बड़ा क्रैश आ सकता है। डालियो ने सवाल उठाया कि किसी नई तकनीक के बारे में निवेशकों को तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए कि यह किसके लिए फायदेमंद है, क्या यह वास्तव में रिटर्न पैदा कर रही है और क्या निवेशक इसके लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं?

1920 के दशक से AI तक, कहानी कितनी समान?

Dalio ने AI की मौजूदा तेजी की तुलना 1920 के दशक के आखिरी दौर से की। उस समय बिजली, रेफ्रिजरेशन, टेलीफोन, रेडियो, हवाई जहाज और ऑटोमोबाइल जैसी तकनीकें तेजी से लोकप्रिय हो रही थीं। निवेशकों को लग रहा था कि इन तकनीकों से अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। उन्होंने कहा, तकनीक का महत्व वास्तविक था, लेकिन कई कंपनियों के शेयरों की कीमतें उनकी कमाई से बहुत आगे निकल गई थीं। इसके बाद बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। इसे लेकर डालियो का तर्क है कि आज AI को लेकर भी निवेशकों में कुछ ऐसा ही उत्साह दिखाई दे रहा है। AI कंपनियों की भविष्य की कमाई और विकास की उम्मीदों को देखते हुए वैल्यूएशन तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में अगर वास्तविक कमाई उम्मीदों के मुताबिक नहीं आती है, तो ऊंचे वैल्यूएशन पर दबाव बन सकता है।

AI पर भरोसा, लेकिन शेयरों की कीमत पर नहीं

रे डालियो का कहना है कि वे AI को एक खराब टेक्नोलॉजी नहीं मानते हैं। इसके उलट, वे मानते हैं कि AI का प्रभाव बेहद बड़ा हो सकता है। उनकी चिंता टेक्नोलॉजी से ज्यादा उसके लिए चुकाई जा रही कीमत को लेकर है। क्योंकि, यही वह अंतर है जिसे निवेशकों के लिए समझना जरूरी है। किसी कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ सकता है, उसकी तकनीक शानदार हो सकती है और उसका भविष्य मजबूत हो सकता है। लेकिन, अगर शेयर की कीमत पहले ही आने वाले कई सालों की ग्रोथ को शामिल कर चुकी है, तो निवेश पर रिटर्न सीमित हो सकता है। उन्होंने AI की ग्रोथ के पीछे छिपे कर्ज को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जब AI की व्यावसायिक सफलता से उतना रिटर्न नहीं आएग, जितना पैसा स्टॉक्स में कर्ज के तौर पर लगा है, तो अचानक बड़ा क्रैश आ सकता है।

बबल कब फटता है?

रे डालियो के मुताबिक बाजार का बबल उस समय ज्यादा कमजोर होता है, जब निवेशकों को अपनी ‘पेपर वेल्थ’ को वास्तविक पैसे में बदलने की जरूरत पड़ती है। कर्ज चुकाने, खर्च पूरा करने या लिक्विडिटी जुटाने के लिए शेयर बेचने पड़ सकते हैं। ऐसे में अगर एक साथ बड़ी संख्या में निवेशक बिकवाली करने लगें, तो गिरावट तेजी से बढ़ सकती है। शुरुआत में जो सिर्फ वैल्यूएशन करेक्शन लगता है, वह बाद में बड़े बाजार संकट में बदल सकता है। यही वजह है कि सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि AI सेक्टर कितना तेजी से बढ़ रहा है। निवेशकों को यह भी देखना होगा कि कंपनियां कितना कमा रही हैं, उस कमाई के मुकाबले शेयर कितने महंगे हैं और भविष्य की ग्रोथ के लिए कंपनियां कितना खर्च या कर्ज कर रही हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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