पिता ने सब्जी बेचकर बच्चों को पढ़ाया
नवगछिया के गोपालपुर प्रखंड के डिमहा गांव की रहने वाली मोनिका का सफर संघर्षों से भरा रहा है। साधारण परिवार में पली-बढ़ी मोनिका के पिता विनोद साह ने दिल्ली में रिक्शा चलाकर और सब्जी बेचकर अपने पांच बच्चों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी के बावजूद मोनिका ने अपनी लगन और मेहनत से खो-खो में देश के लिए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
संघर्ष और सफलता की कहानी
मोनिका के पिता ने बताया कि घर के आर्थिक हालात इतने खराब थे कि कई बार मोनिका को खेल छोड़ने के लिए कहा गया। यहां तक कि शादी के लिए भी दबाव डाला गया, लेकिन मोनिका ने हमेशा कहा, "पहले अपने पैरों पर खड़ी हो जाऊंगी, फिर शादी करूंगी।" उनकी मां ने भी मोनिका के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की। आज उनके संघर्ष का फल पूरे गांव और देश के सामने है।
घर की स्थिति आज भी दयनीय
मोनिका के घर में अभी भी गैस चूल्हा नहीं है और खाना मिट्टी के चूल्हे पर पकता है। परिवार को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। पिता विनोद साह और मां को उम्मीद है कि मोनिका की इस सफलता के बाद सरकार उनकी स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाएगी।
गांव में खुशी की लहर
मोनिका की इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। लोग उनके घर जाकर उनके माता-पिता को बधाई दे रहे हैं। मोनिका ने अपने प्रदर्शन से न सिर्फ देश का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि मेहनत और लगन से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
