
एक्सप्रेसवे
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे की लागत
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे के लिए 3950 रुपये में जमीन खरीदी की जाएगी। संबंधित रूट पर पड़ने वाले किसानों और कास्तकारों की जमीन के सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जाएगा, जिससे जमीन मालिकों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। इसके निर्माण के लिए 11,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रभात खबर के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पूरी परियोजना को विकसित करने में 15,450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। माना जा रहा है कि 5 जिलों के अंतर्गत सैकड़ों गांव आ सकते हैं, जिनकी जमीन अधिग्रहित की जाएगी। हालांकि, किन गावों को इसका फायदा होगा। इसकी डिटेल्स अभी सामने नहीं आई है।

नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे रूट मैप
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे को निर्माण के लिए केंद्रीय सड़क एंव परिवहन राजमार्ग मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करें, ताकि तय समय पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा सके। इस प्रस्तावित, सड़क को ग्रीनफील्ड हाईस्पीड कॉरिडोर के तौर पर विकसित करने की बात कही जा रही है। यह मार्ग बगहा (एनएच-772 ए) को भोजपुर जिले के पातर तक निर्मित किया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे से सीधे तौर पर 5 जिलों को फायदा होगा। कॉरिडोर में गंडक नदी पर एक नया ब्रिज बनाया जाना प्रस्तावित है। यह पातर (आरा) में यह सड़क पटना-आरा-सासाराम हाईस्पीड कॉरिडोर (एनएच-11ए) से कनेक्ट होगा। इस तरह बगहा से आरा होते हुए सासाराम और वाराणसी-कोलकाता होते हुए उत्तर प्रदेश और उससे आगे का सफर सुगम होगा। इसे प्रोजेक्ट से भोजपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण को सीधे कनेक्टिविटी आसान होगी। इन जिलों के लोग कम समय में अधिक दूरी तय कर सकेंगे, जिससे ईधन के साथ समय की भी बचत होगी।
| जानकारी | विवरण |
| एक्सप्रेसवे का नाम | नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे |
| नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई | 225 किमी. |
| नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे की लागत | 15450 (4000) प्रस्तावित |
| नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे के जिले | भोजपुर, सारण, सीवान, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण |
| नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे का शुरुआती बिंदु | बगहा (एनएच-772 ए) |
| नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे का अंतिम बिंदु | पातर (भोजपुर) |
| लेन संख्या | 6 संभावित |
| निर्माण कंपनी | अभी तय नहीं |
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे के फायदे
नारायणी-गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण से स्थानीय किसानों की आर्थिक समृद्धि होगी। इस मार्ग के शहरी क्षेत्रों के आसपास रियल स्टेट (Real State) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही 225 किलोमीटर की दूरी तक कई हाईटेक व्यवस्थाएं की जाएंगी, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, बाजार और रोजमर्रा से जुड़ी दुकानें इत्यादि खुलेंगी। इसके अतिरिक्त औद्योगिक इकाईयां स्थापित होने के चांस रहेंगे, जिससे लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
