पटना

Patna's Parab Brass Hub: मुरादाबाद की तरह पीतल हब बनेगा बिहटा का परेब, 2 हजार कारीगर बनाएंगे आधुनिक डिजाइन के बर्तन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 30, 2023, 12:37 PM IST

Patna's Parab Brass: देश-विदेश में पीतलनगरी के रूप में पहचान रखने वाले मुरादाबाद की तरह पटना का परेब भी पीतल हब बनेगा। इसकी घोषणा के बाद से इस कारोबार से जुड़ीं महिलाएं एवं अन्य लोगों का मनोबर बढ़ गया है। पीतल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुरादाबाद की तरह इन्हें सब्सिडी भी दी जाएगी। दरअसल, इस क्षेत्र में लंबे समय से पीतल का कारोबार हो रहा है। सरकारी सहायता मिलने के बाद इस कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। यहां भी अत्याधुनिक मशीनों से बर्तन बनाए जाएंगे।

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बिहटा प्रखंड की परेब पंचायत में पीतल के बर्तनों का लगा स्टॉल (फाइल फोटो)

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • पटना जिला स्थित बिहटा में है परेब पंचायत
  • पीतल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मिलेगी सब्सिडी
  • परेब को मुरादाबाद की तरह किया जाएगा विकसित

Parab Brass: पटना जिले के बिहटा प्रखंड की परेब पंचायत की पहचान अब पीतलनगरी के रूप में होगी। इस इलाके को मुरादाबाद की तर्ज पर विकसित एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पीतल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए मुरादाबाद की तरह यहां भी सब्सिडी दी जाएगी। परेब में दो हजार कारीगार पीतल की आधुनिक डिजाइन के बर्तन बनाएंगे। इसके लिए देश के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा यहां के कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इतना ही नहीं परेब में ही एक कच्चा माल बैंक बनेगा। इससे मांग के अनुसार बर्तन को बनाया जा सकेगा। इस जगह अत्याधुनिक मशीनें भी लगाई जाएंगी, जिससे कारीगरों को अलग-अलग डिजाइन के बर्तन बनाने में सहूलियत होगी।

राज्य सरकार ने परेब में पीतल उद्योग के लिए 960 लाख रुपए की कार्ययोजना बनाई है। इससे यहां के 500 परिवारों के कारीगरों को रोजगार मिलने के साथ देश-दुनिया के स्तर पर पीतल के बर्तन बेचने का बाजार भी मिल जाएगा। उद्योग विभाग और जिला प्रशासन द्वारा तैयार सूक्ष्म लघु क्लस्टर योजना पर जल्द काम शुरू होगा।

8 तरह के पीतल बनाने की मिलेंगी मशीनें

योजना के मुताबिक परेब के कारीगरों को आठ तरह के पीतल बनाने की मशीनें दी जाएंगी। मशीनों से 11 तरह के पीतल के बर्तन बनाए जाएंगे। उद्योग विभाग का कहना है कि पीतल उद्योग से अगले तीन साल में कारीगरों की आय चार गुना बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं क्लस्टर के मौजूदा टर्नओवर को पांच गुना बढ़ाए जाने की तैयारी है। बर्तनों का उत्पादन अत्याधुनिक मशीन से होने के कारण उत्पादन भी पांच गुना अधिक होगा। कॉमन फैसिलिटी सेंटर के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार में बर्तन बेचने की योजना है। परेब के भी पीतल के बर्तन पर अलग-अलग कलाकृतियां रहेंगी।

661.09 लाख रुपए से खरीदी जाएंगी मशीनें

राज्य सरकार द्वारा पीतल उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए 960.10 लाख रुपए खर्च किए जाने हैं। सॉफ्ट इंटरवेशन पर 31.50 लाख रुपए, हार्ड इंटरवेशन में रॉ मेटेरियल बैंक बनाने के लिए 73.12 लाख रुपए, मशीनों को खरीदने के लिए 661.09 लाख रुपए और सामान्य सुविधा केंद्र के लिए 166.43 लाख रुपए खर्च होने हैं। गौरतलब है कि इस क्षेत्र के पीतल के बर्तनों को अभी बिहार में ही उतनी पहचान नहीं मिली है। जबकि यहां वर्षों से पीतल का काम हो रहा है। अब इस घोषणा के बाद परेब के कारीगरों एवं कारोबारियों में उत्साह बढ़ा है। इनमें अपने बर्तनों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद जागी है।
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