पटना

बाढ़-सूखे से बचाया जा सकेगा बिहार: देश की 37 नदियों के मेल से होगा यह कमाल, समझिए 20 जिलों को कैसे मिलेगा लाभ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 23, 2023, 09:30 AM IST

Indian Rivers interlinking Project: बिहार में गंगा घारा, बागमती, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, छाड़ी, नून और दाहाल नदियों को पांच चैनलों में जोड़ा जाएगा। इसके लिए करीब 900 किलोमीटर लंबे लिंक चैनल की खुदाई की जाएगी।

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Indian Rivers interlinking Project

Photo : BCCL

Indian Rivers interlinking Project: देश भर के सभी राज्यों की नदियों को आपस में जोड़े जाने की योजना 2019 में तैयार की गई थी। इसके तहत 37 नदियों को जोड़ा जाएगा, जिसके लिए 20 हजार किलोमीटर क्षेत्र में नहर की खुदाई होगी। इस योजना के क्रम में अब बिहार सरकार ने बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए यहां नदियों को जोड़ने का प्लान तैयार किया है।

जानकारी के मुताबिक, गंगा घारा, बागमती, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, छाड़ी, नून और दाहाल नदियों को पांच चैनलों में जोड़ा जाएगा। इसके लिए करीब 900 किलोमीटर लंबे लिंक चैनल की खुदाई की जाएगी। इन नदियों के आपस में जुड़ने के बाद मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी पश्चिम चंपारण, समस्तीपुर, गोपालगंज समेत 20 जिलों को फायदा पहुंचेगा और करीब 7 लाख हेक्टेयर खेतों तक 12 महीने सिंचाई का पानी भी पहुंचना शुरू हो जाएगा।

बाढ़ और सूखे से मिलेगा छुटकारा

बिहार के जल संसाधप मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है, इससे भारी नुकसान होता है। ऐसे में नदियों को जोड़ने से बाढ़ और सूखे दोनों की समस्या से निजात मिलेगी और राज्य का भूजल स्तर भी बढ़ेगा। उन्होंने बताया, इस साल ही बिहार के 15 जिलों में ग्राउंट वॉटर लेवल गिरने से पेयजल की समस्या हुई। नदियों को लिंक करने से इससे छुटकारा मिलेगा।

बिहार में होंगे ये पांच चैनल

बिहार में बागमती-बूढ़ी गंडक लिंक योजना को दो चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में 139 करोड़ से संचचना और गेट का निर्माण होगा और दूसरे चरण में नदियों को जोड़ा जाएगा, जिससे 1.35 लाख हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होगी। इसी तरह गंडक-छाड़ी-गंगा लिंक से गोपालगंज, सिवान और सारण जिलों के लोगों को फायदा होगा। तीसरा चैनल कोची-मेंची लिंक योजना होगा, इसके तहत 76.20 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी। इससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार जिलों के लोगों को फायदा पहुंचेगा। चौथा चैनल गंडक-दाहा-घाघरा होगा। इसके तहत गंडक नदी के पानी को दाहा नदी के रास्ते सारण के फलवारिया गांव के पास घाघरा में स्थानांतरिक किया जाएगा। पांचवा बूढ़ी गंडक-नून-गंगा लिंक योजना से समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया को फायदा पहुंचेगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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