पटना

बिहार में बड़ी सियासी उथल-पुथल, नीतीश के करीबी रहे आरसीपी सिंह BJP में हुए शामिल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 11, 2023, 02:07 PM IST

Bihar Politics: आरसीपी सिंह ने बीते साल अगस्त में जदयू से इस्तीफा दे दिया था। वह कभी पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखते थे। हालांकि, बीते साल राज्यसभा चुनाव में जदयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद नीतीश कुमार से उनकी तल्खी बढ़ गई और अगस्त में उन्होंने जदयू से इस्तीफा दे दिया था।

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आरसीपी सिंह आज हो सकते हैं भाजपा में शामिल

Photo : BCCL

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी उथल-पुथल की खबर सामने आई है। कभी जदयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले नेता आरसीपी सिंह आज भाजपा में शामिल हो गए। दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंंद्र प्रधान की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी महासचिव अरुण सिंह और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी भी मौजूद रहे।

आरसीपी सिंह भाजपा में ऐसे समय पर शामिल हुए हैं, जब नीतीश कुमार महाराष्ट्र दौरे पर हैं। वह लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को एक करने में जुटे हुए हैं। गुरुवार को उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। बता दें, आरसीपी सिंह ने बीते साल अगस्त में जदयू से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह कदम बीते साल हुए राज्यसभा चुनाव में जदयू से टिकट न मिलने के बाद उठाया था।

मोदी कैबिनेट में शामिल होने के बाद से बढ़ती गई तकरार

दरअसल, राज्यसभा सांसद रह चुके आरसीपी सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उन्हें केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाया गया था। हालांकि, यहीं से आरसीपी सिंह के नीतीश कुमार से रिश्ते खराब होते चले गए और धीरे-धीरे आरसीपी का जदयू में कद भी घटता चला गया। बीते साल जब जदयू ने आरसीपी को राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया तो दोनों के बीच यह तल्खी खुलकर सामने आ गई। इसके बाद नीतीश ने आरसीपी के करीबी नेताओं को भी जदयू से बाहर कर दिया।

जदयू को हो सकता है बड़ा नुकसान

आरसीपी सिंह के भाजपा में शामिल होने से जदयू को बिहार में बड़ा नुकसान हो सकता है। दरअसल, आरसीपी कुर्मी समाज से आते हैं और वह अब तक नीतीश की पार्टी के कोर वोटर माने जाते थे। ऐसे आरसीपी के भाजपा में शामिल होने से आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को बड़ा नुकसान हो सकता है। क्योंकि भाजपा नीतीश के इस कोर वोटबैंक को आरसीपी के जरिए तोड़ने की कोशिश करेगी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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