Noida News: नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में एसआईटी ने माना है कि घटनास्थल पर मौजूद रेस्क्यू टीम से युवराज को बचाने में गंभीर चूक हुई है। रिपोर्ट में प्राधिकरण, एसडीआरएफ, दमकल विभाग और पुलिस के करीब एक दर्जन अधिकारियों व कर्मचारियों को जिम्मेदार माना गया है। SIT की रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
विभागों ने एक-दूसरे को ठहराया जिम्मेदार
बताया गया है कि इस मामले में जांच समिति को प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन की ओर से करीब 700 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में अलग-अलग विभागों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भी की है। SIT ने जांच के दौरान जलभराव से जुड़ी प्लानिंग, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम, कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग, रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम और घटनास्थल पर तैनात अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल की है।
युवराज को बाहर निकालने में क्यों लगे 2 घंटे
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की रिपोर्ट में सबसे अहम सवाल यह रहा है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान युवराज को बाहर निकालने में करीब दो घंटे क्यों लग गए। इस देरी को ही हादसे में जान गंवाने का बड़ा कारण माना गया है, अगर समय रहते कार्रवाई होती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
16 जनवरी को युवराज की मौत
गौरतलब है कि 16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार हादसे का शिकार हो गई थी। घने कोहरे के कारण युवराज की गाड़ी पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। इस हादसे में युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, जिस गड्ढे में युवराज की कार गिरी, उसकी खुदाई मॉल का बेसमेंट बनाने के लिए की गई थी। लेकिन यहां पर कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी का साइन बोर्ड नहीं लगा हुआ था। युवराज के परिजनों ने इस हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। जिसके बाद एसआईटी गठित की गई।
