Noida News: नोएडा पुलिस ने साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों की सप्लाई चेन तोड़ते हुए एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। थाना फेस-3 पुलिस ने सेक्टर 66 की ग्रीन बेल्ट के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोलते और उन्हें साइबर अपराधियों को उच्च कीमत पर बेचते थे। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल ठगी, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, सट्टेबाजी और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वरुण प्रताप सिंह (35), सार्थक गुप्ता (20), अर्थव दीक्षित (19) और मोनू यादव (25) के रूप में हुई है।
जानकारी के मुताबिक, सभी आरोपी मैनपुरी जिले के निवासी हैं और उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 मोबाइल फोन, 7 डेबिट कार्ड, एक चेक बुक और सफेद रंग की बलेनो कार जब्त की है। जांच में पता चला कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके विभिन्न बैंकों में खाते खोलते थे। मोनू यादव इस पूरे नेटवर्क में सप्लायर की भूमिका निभा रहा था। एक खाते की पूरी किट, जिसमें चेकबुक, डेबिट कार्ड और सिम कार्ड शामिल होते थे, जो गरीब या अनजान लोगों से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर तैयार की जाती थी और फिर इसे साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।
खातों की लेन-देन सीमा लाखों से करोड़ों तक
जानकारी के अनुसार, हर एक खाते के लिए लगभग 60,000 रुपये तय किए जाते थे। साइबर गिरोह इन खातों के माध्यम से रोजाना लेन-देन करता और इसके बदले सप्लायर्स को प्रतिदिन 50,000 रुपये तक दिया जाता था। इन खातों की लेन-देन सीमा 50 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक रखी जाती थी, ताकि बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन आसानी से किए जा सकें। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि ये खाते डिजिटल ठगी, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड और सट्टे से होने वाली कमाई को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसी वजह से कोटक बैंक में खोला गया एक करेंट अकाउंट प्रतिदिन एक करोड़ रुपये की सीमा के साथ संचालित किया जा रहा था।
फरार आरोपियों की खोज में जुटी है पुलिस
पुलिस के अनुसार, आरोपी बेहद सतर्क और तकनीकी रूप से चालाक थे। ये लोग व्हाट्सऐप वॉयस कॉल और डिस्पियरिंग चैट्स का इस्तेमाल करते थे ताकि कोई सबूत न छोड़ा जाए। मोनू यादव के फोन से पहले बेचे गए तीन अन्य खातों की भी जानकारी मिली है, जिनकी जांच अभी चल रही है। पुलिस अब फरार आरोपियों की खोज में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों में सक्रिय है। अधिकारियों ने बताया कि नोएडा क्षेत्र में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही अन्य गिरफ्तारी भी हो सकती है। नागरिकों को भी चेतावनी दी गई है कि वे किसी संदिग्ध गतिविधि, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट या संदिग्ध खातों में पैसे भेजने से बचें।
(इनपुट - आईएएनएस)
