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Noida News: नोएडा में पहली बार होगी अवारा कुत्तों की गणना, बड़ी सोसाइटी समेत इन जगहों से डेटा किया जायेगा एकत्रित

Noida: नोएडा में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को देखते हुए इस साल अक्टूबर में पशुपालन विभाग पहली बार कुत्तों की जनगणना करने जा रहा है। बता दें, इस वर्ष जनवरी से मई के बीच सरकारी अस्पतालों और रेबीज केंद्रों में कुत्तों के काटने के अनुमानित 61232 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद ये कदम उठाया गया है।

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नोएडा में पहली बार होगी कुत्तों की गणना

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Noida: आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को देखते हुए नोएडा इस साल अक्टूबर में पहली बार कुत्तों की जनगणना करने जा रहा है। उम्मीद है कि इस जनगणना से नोएडा को नस्ल-विशिष्ट डेटा बनाए रखने में मदद मिलेगी, जो नसबंदी और टीकाकरण के लिए दिशा-निर्देश और नीतियां बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। सर्वेक्षण के लिए पशुपालन विभाग की टीमें आवारा कुत्तों की गिनती करने के लिए जिले भर में गेटेड सोसायटियों का दौरा करेंगी। पिछले कुछ महीनों में शहर के कई हिस्सों, खास तौर पर ऊंची इमारतों वाली सोसायटियों में जानवरों के साथ क्रूरता और फीडर्स और निवासियों के बीच झगड़े के कई मामले सामने आए हैं। कई मामलों में, निवासियों ने कुत्तों को नुकसान पहुंचाने और उन्हें दूसरी जगह ले जाने की धमकी भी दी है।

इस साल कुत्तों के काटने के 61232 मामले किए गए दर्ज

इस वर्ष जनवरी से मई के बीच सरकारी अस्पतालों और रेबीज केंद्रों में कुत्तों के काटने के अनुमानित 61232 मामले दर्ज किए गए। जुलाई में जिला प्रशासन ने भंगेल, सेक्टर 130, सेक्टर 45, जेजे कॉलोनी और खोड़ा को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया था, जहां से कुत्तों के काटने के अधिकतम मामले सामने आए थे। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विपिन कुमार अग्रवाल ने बताया कि आवारा कुत्तों की आबादी के बारे में कोई डेटा न होने के कारण जिला प्रशासन के लिए उनकी संख्या पर लगाम लगाना एक बड़ी चुनौती है। आवारा कुत्तों की बड़ी आबादी के कारण उनकी गिनती करना एक चुनौतीपूर्ण काम होगा। उन्होंने कहा कि इस जनगणना के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सदस्यों वाली 80 व्यक्तियों की एक टीम बनाई गई है। उनकी जिम्मेदारियों में ऊंची इमारतों में आवारा कुत्तों की गिनती करना शामिल होगा, ताकि सबसे व्यापक और सटीक डेटा संग्रह सुनिश्चित किया जा सके।

टीमें कुत्तों की नस्लों पर व्यापक डेटा एकत्र करने के लिए उन्नत मोबाइल और वेब एप्लिकेशन का उपयोग करेंगी। डेटा दिसंबर के अंत तक संकलित किया जाना है। अधिकारियों के अनुसार, यह नई जनगणना हर पांच साल में की जाने वाली 21वीं पशुधन जनगणना के साथ-साथ की जाएगी। 2019 में की गई पिछली गणना में जिले में 3.79 लाख मवेशी थे। 2007 में जिले में कुल 3.44 लाख मवेशी और 2012 में 3.69 लाख मवेशी दर्ज किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि किसानों और पशुपालकों की आजीविका के स्वरूप में बदलाव, तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों की वृद्धि दर धीमी हो गई है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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