नोएडा

FNG को लेकर जगी है थोड़ी उम्मीद; शायद इस बार पूरी हो जाए 14 साल से लटकी परियोजना

दिल्ली एनसीआर के तीन शहरों को जोड़ने वाली FNG परियोजना के काम में कुछ उम्मीद दिखी है। करीब 14 साल से लंबित इस परियोजना में पहले तो इसे नेशनल हाईवे का दर्जा न मिलने से देरी हुई। अब हरियाणा सरकार ने इस परियोजना को हरी झंडी देने का इशारा किया है।

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FNG एक्सप्रेसवे बनने की बढ़ी उम्मीद

Photo : Twitter

दिल्ली एनसीआर के तीन शहर, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद को जोड़ने के लिए और साथ ही इन शहरों के बीच लगने वाले जाम की समस्या के हल के लिए FNG एक्सप्रेसवे की पहल की गई थी। नोएडा अथॉरिटी के प्रस्तावित की गई इस परियोजना को लगभग 14 साल हो गए हैं।

योजना तैयार करते समय यह तय हुआ था कि इसको पूरा करने के खर्च में आधी-आधी हिस्सेदारी हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार की होगी। दोनों राज्यों के अधिकारियों की कई बैठकों के बाद भी इस मामले में कोई खास सहमति होती नहीं दिखी।

साल 2014-15 के आसपास नोएडा अथॉरिटी की तरफ से इसे नेशनल हाईवे का दर्जा दिलाने की पहल हुई। ऐसे में इस परियोजना का खर्च केंद्र सरकार का राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) उठाता। यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र सरकार के पास भेजा गया। NHAI की टीम और नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों की बैठक के बाद ये मामला ठप हो गया।

नोएडा अथॉरिटी की तरफ से 2018 में एक बार फिर इसे नेशनल हाईवे का दर्जा दिलाने की कोशिश की गई लेकिन फिर सहमति नहीं बन पाई। NHAI की तरफ से अगर इसे मंजूरी मिल गई होती तो शायद अब तक FNG एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां दौड़ भी रही होतीं।

बीते दिनों हरियाणा सरकार ने FNG एक्सप्रेसवे को हरी झंडी दे दी, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि शायद अबकी बार इसका काम पूरा हो जाए।

बीते दिनों हरियाणा के नागरिक उड्डयन मंत्री विपुल गोयल ने राज्य के बजट पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर जानकारी दी। कथित FNG एक्सप्रेसवे की मंजूरी के साथ ही जरूरी योजनाओं और मानचित्रों को भी मंजूरी दे दी गई है।

गौरतलब है कि नोएडा में इस एक्सप्रेसवे के 17 किलोमीटर लंबे मार्ग का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। FNG एक्सप्रेसवे से उम्मीद है कि इस के शुरू होने से फरीदाबाद और गाजियाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर केवल 30 मिनट रह जाएगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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