Noida: एफएनजी (फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद) मार्ग का निर्माण कौन-सा सरकारी विभाग करवाएगा इसे लेकर हरियाणा सरकार अब तक फैसला नहीं ले पाई है। एफएनजी मार्ग को लेकर पिछले करीब 13 सालों से हरियाणा सरकार असमंजस में हैं। यही वजह है कि इस परियोजना की फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग के पास भटकती रहती है। एफएनजी मार्ग परियोजना के लिए सबसे पहले कवायद पीडब्ल्यूडी के माध्यम से की गई थी। इसके बाद सरकार ने निर्माण हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से कराने के लिए अफसरों को निर्देशित दिए थे। फिर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में इसकी फाइल रही, जहां विभाग के अधिकारियों ने परियोजना के निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा।
कौन सा विभाग करेगा निर्माण ?
इसके बाद इस परियोजना की अनुमानित लागत 350 करोड़ रुपये तत्कालीन मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत की गई। यह कार्य फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण को दिया गया। प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस परियोजना का डीपीआर तैयार करने के लिए पीडब्ल्यूडी को सौंपा। लेकिन, अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि आखिर इस परियोजना का निर्माण कौन से विभाग के द्वारा किया जाना है।
पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया था निर्माण कार्य
पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त अधिकारी डीएस डांडा का कहना है कि एफएनजी परियोजना को शुरुआत में पीडब्ल्यूडी को ही दिया गया था, लेकिन सरकार बदलने पर इसे अलग-अलग विभागों के हवाले करने की कोशिश की गई। डीपीआर तो पीडब्ल्यूडी तैयार करवा रहा है। लेकिन, इसके निर्माण कौन सा विभाग करवाएंगा, यह तय नहीं है। वहीं फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) के तत्कालीन सीईओ सुधीर राजपाल और एसीइओ डॉ. गरिमा मित्तल ने बीत साल एफएनजी का मार्ग तय करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लालपुर में यमुना तक दौरा किया।
ग्रीन एक्सप्रेसवे से जोड़ने का प्लान
पिछले साल एफएमडीए की बैठक में एफएनजी मार्ग को तीन एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबईएक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के लिए ग्रीन एक्सप्रेसवे से जोड़ने पर मंथन किया गया था। लेकिन, फाइल में अभी इस पर कुछ नहीं किया गया। सेवानिवृत्त अधिकारी डीएस ढांडा ने बताया कि शुरुआत में हरियाणा सरकार ने इसे भविष्य में सोहना और गुरुग्राम की सड़कों से जोड़ने की बात की थी। लेकिन, सरकारी उदासीनता के कारण यह परियोजना शुरू नहीं हो पाई।
75 किलोमीटर लंबा एफएनजी
अधिकारियों ने फरीदाबाद में संपर्क मार्ग पर आने-जाने के रास्तों का निरीक्षण किया था। निरक्षण के बाद योजना के अंतर्गत आने वाली रुकावटों को भी देखा और पाया कि एफएनजी का रूट तय करने के लिए जमीन का अधिकरण जरूरी है। अधिकारियों का मानना है कि मार्ग बनने से फरीदाबाद के विकास को रफ्तार मिलेगी और लोगों को सहूलियत होगा। आपको बता दें कि एफएनजी करीब 75 किलोमीटर लंबा है। जिसका 23 किलोमीटर का हिस्सा नोएडा में आता है। शुरुआती दौर में यह तय किया गया था कि इसे पूरा करने में जो भी खर्ज आएगा, उसे यूपी और हरियाणा सरकार मिलकर खर्ज करेगी। लेकिन, इसे लेकर भी अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
7 सालों से बंद पड़ा है काम
इस योजना के तैयार होने पर इसमें एलिवेटेड रोड, अंडरपास, पुल बनाने का का खाका खींचा गया है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का इसपर कहना है कि एफएनजी के 75 किलोमीटर में से नोएडा सड़क बनाने का हिस्सा करीब 19 किलोमीटर लंबा है। बाकि चार किलोमीटर में पुल, अंडरपास आदि आएंगे। योजना तैयार कर नोएडा प्राधिकरण ने अपने क्षेत्र का काम तैयार कर दिया था। लेकिन, कुछ हिस्से में सड़क बनने के बाद काम बंद हो गया है। पिछले सात सालों से आज तक यह काम अधुरा पड़ा है।
