Bihar Fake Currency Case: भारत-नेपाल सीमा से नकली नोटों की तस्करी के एक बड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। बिहार के मधुबनी जिले से जुड़े नकली भारतीय नोट (Fake Indian Currency Note - FICN) तस्करी केस में NIA ने दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों की पहचान भरत महासेठ और शिव कुमार राउत उर्फ मेहमान के रूप में हुई है। दोनों पर नेपाल से नकली नोट लाकर भारत में खपाने की साजिश का आरोप है। NIA ने 30 अक्टूबर 2026 को पटना की विशेष NIA अदालत में यह चार्जशीट भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दाखिल की है।
दुहबी बाजार में बरामद हुए थे 281 नकली नोट
यह पूरा मामला 2 अगस्त 2026 का है। मधुबनी जिले के बासोपट्टी इलाके के दुहबी बाजार में सशस्त्र सीमा बल (SSB), बिहार STF और बिहार पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की थी। इस दौरान टीम ने 281 नकली भारतीय नोट बरामद किए थे, जिनकी कुल कीमत 50,150 रुपये आंकी गई थी। शुरुआत में इस मामले में बासोपट्टी थाने में तीन लोगों - हीरा महासेठ उर्फ चाची, भरत महासेठ और शिव कुमार राउत के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मामले में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केस को NIA को ट्रांसफर कर दिया। NIA ने 9 सितंबर 2026 को दोबारा केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।
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नेपाल कनेक्शन का खुलासा
NIA की जांच में खुलासा हुआ है कि भरत महासेठ और शिव कुमार राउत, हीरा महासेठ उर्फ चाची के नेटवर्क के जरिए नेपाल से नकली नोटों की तस्करी कर रहे थे। साजिश के तहत इन नकली नोटों को असली बताकर मधुबनी और आसपास के भारतीय बाजारों में चलाने की योजना थी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सके।
जांच के दौरान NIA ने 8 अक्टूबर 2026 को मधुबनी जिले में 12 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी में एजेंसी ने कई डिजिटल डिवाइस, आपत्तिजनक दस्तावेज, नकदी और अन्य अहम सबूत बरामद किए थे। एजेंसी का कहना है कि मामले में नकली नोटों की तस्करी के सोर्स, नेपाल में बैठे हैंडलर्स और फंडिंग नेटवर्क को लेकर आगे की जांच जारी है। तीसरे आरोपी हीरा महासेठ की भूमिका को लेकर भी जांच चल रही है।
