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'माफ़ करना, बहुत दूर जा रहा हूं', सीकर में NEET अभ्यर्थी ने की आत्महत्या; सुसाइड नोट में लिखीं भावुक बातें

राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने परिवार से माफी मांगते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया।

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नीट छात्र ने की आत्महत्या (फोटो-Istock)

सीकर में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रहे इस कोचिंग छात्र ने अपने कमरे में आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस को मृतक के पास से जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें उसने अपने परिवार से माफी मांगते हुए बेहद भावुक बातें लिखी हैं। छात्र ने लिखा: "सॉरी, बहुत दूर जा रहा हूँ, नहीं पता कहाँ..."। इस नोट से साफ जाहिर होता है कि वह किसी गहरे मानसिक तनाव या दबाव से गुजर रहा था।

तनाव में था छात्र

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया गया है और छात्र के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि छात्र आखिर किस बात को लेकर तनाव में था— क्या यह पढ़ाई और परीक्षा का दबाव था या फिर इसके पीछे कोई और वजह थी।

छात्रों पर परीक्षा में सफल होने का अत्यधिक दबाव-मनोवैज्ञानिक

राजस्थान के कोटा और सीकर जैसे शहर मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्रों के प्रमुख केंद्र (Coaching Hubs) हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इन कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे छात्रों के बीच आत्महत्या और मानसिक अवसाद के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि परीक्षा में सफल होने का अत्यधिक दबाव, परिवार की उम्मीदें और अकेलेपन के कारण कई बार छात्र ऐसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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