Mumbai News: मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक बड़े बदलाव का समय आ गया है । पिछले कई दशकों से लोनावला और खंडाला के घाटों में घंटों फंसे रहने वाले यात्रियों के लिए अब राहत की खबर है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने इस अप्रैल में पुलों पर भारी ट्रकों के साथ लोड टेस्टिंग का काम शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि प्रोजेक्ट का 99% काम पूरा हो चुका है। अब बस फिनिशिंग टच और साइन बोर्ड लगाने का काम शेष है, जिसके बाद लोनावला का वह भीषण ट्रैफिक जाम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
क्या है यह जादुई मिसिंग लिंक और बाईपास
मिसिंग लिंक असल में 13.3 किलोमीटर लंबा एक बाईपास है जिसे खास तौर पर से अदोशी-खंडाला घाट की परेशानी को खत्म करने के लिए बनाया गया है। अब यात्रियों को खंडाला के खतरनाक घुमावदार मोड़ों और मानसून में गिरने वाले पत्थरों के डर से नहीं जूझना होगा। इंजीनियरों ने पहाड़ों के चारों ओर सड़क बनाने के बजाय सीधे उनके बीच से रास्ता निकालने का बड़ा फैसला लिया। यह नया मार्ग खोपोली एग्जिट से शुरू होकर कुसगांव पर जाकर एक्सप्रेसवे से वापस जुड़ जाता है, जिससे घाट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा पूरी तरह कट जाता है।
विश्व रिकॉर्ड सुरंग और बादलों को छूता विशाल पुल
इस प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग तकनीक पूरी दुनिया को हैरान करने वाली है। यहां जुड़वां सुरंगें बनाई गई हैं जिनकी चौड़ाई लगभग 23.5 मीटर है, जो आधिकारिक तौर पर एक विश्व रिकॉर्ड है। इन सुरंगों के अंदर आठ लेन का रास्ता होगा जो सुगम यातायात सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, टाइगर वैली के ऊपर 650 मीटर लंबा एक विशाल पुल बनाया गया है जो 182 मीटर ऊंचे टावरों पर टिका है। यह पुल बांद्रा-वर्ली सी लिंक से भी ऊंचा है और इस पर गाड़ी चलाना किसी 'कार स्काईवॉक' जैसा अनुभव देगा। इस बाईपास से यात्रा की दूरी 6 किलोमीटर कम होगी, लेकिन असली जीत समय की है क्योंकि इससे लगभग 25 से 30 मिनट की बचत होगी।
उद्घाटन की तारीख
मैजिकब्रिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार Mumbai Pune Expressway के इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन 1 मई 2026 यानी 'महाराष्ट्र दिवस' के शुभ अवसर पर करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात को चरणों में शुरू किया जाएगा। पहले तीन महीनों के लिए केवल हल्की गाड़ियों जैसे कार और एसयूवी को ही अनुमति दी जाएगी। इसके बाद अगले तीन महीनों में भारी वाहनों और बसों को प्रवेश मिलेगा। छह महीने के परीक्षण के बाद ही ज्वलनशील पदार्थों वाले टैंकरों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा ताकि लंबी सुरंगों के भीतर वेंटिलेशन और अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रियल एस्टेट पर बड़ा असर
इस विश्व स्तरीय इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट पर करीब 6,695 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस नए लिंक का उपयोग करने के लिए आपको किसी नए टोल बूथ पर अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। इस लागत की भरपाई मौजूदा टोल सिस्टम के माध्यम से ही की जा रही है, जिसके लिए राज्य ने एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली की अवधि को 2045 तक बढ़ा दिया है। इस प्रोजेक्ट का असर सड़क के किनारे स्थित जमीनों की कीमतों पर भी दिखने लगा है। खोपोली, कर्जत और पुणे के पश्चिमी उपनगरों जैसे हिंजवड़ी और बानेर में प्रॉपर्टी की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
