Mumbai News: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा संयुक्त मार्च निकाले जाने पर पुलिस ने कार्रवाई की है।पुलिस ने संयुक्त मार्च के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
संयुक्त मार्च पर पुलिसिया कार्रवाई
पुलिस ने इस मार्च को लेकर मामला दर्ज किया है। मुंबई के आजाद मैदान थाने में दर्ज शिकायत में आयोजकों पर आरोप है कि यह मार्च आवश्यक पुलिस अनुमति के बिना निकाला गया था।
मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक निकाला गया मार्च
बता दें कि आज दिन में मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक निकाले गए इस मार्च में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। इस दौरान दोनों दलों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी। इस दौरान राज ठाकरे ने कहा कि सरकार चुनने का अधिकार जनता का है, चुनाव आयोग का नहीं, जबकि उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
ठाकरे बंधुओं ने एक साथ आकर लगाए थे आरोप
इस संयुक्त विरोध मार्च के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया है। उद्धव ने कहा कि पश्चिम बंगाल के एक उपचुनाव में मतदान के अधिकार को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, लेकिन अब तक सुनवाई को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट की जा रही है और जनता को इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक SIR केवल आपात परिस्थितियों में कराया जाता है, लेकिन विधानसभा चुनावों के दौरान 40 से 60 लाख नए मतदाता जोड़े गए और इसी के जरिए सत्ता हासिल की गई। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि अब SIR के माध्यम से करीब दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दिल्ली जाकर SIR रद्द कराने की मांग उठाने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि ईवीएम का उपयोग बंद कर चुनाव फिर से मतपत्रों के जरिए कराए जाने चाहिए।
