महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में एक बड़ी घटना हुई। यह बड़ी घटना कुछ और नहीं बल्कि दोनों ठाकरे बंधुओं के करीब आने से जुड़ी थी। दोनों ने दशकों बाद मंच साझा किया और दोनों के फिर से एक होने की खबरों से राजनीति का रुख पटलने की बातें होने लगीं। लेकिन सच्चाई यह है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने अभी तक तय नहीं किया है कि वह उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ चुनावी गठबंधन करेंगी भी या नहीं। हाल ही में विजय रैली में दोनों नेताओं के बीच गले मिलने की घटना को सिर्फ एक फोटो सेशन के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्तमान में राजनीतिक रूप से अलग-थलग दिख रहे हैं। ऐसे में वह उम्मीद कर रहे होंगे की राज ठाकरे की मदद से वह अपनी पार्टी शिवसेना (UBT) को पुनर्जीवित कर सकें। इधर राज ठाकरे ने यह भी साफ कर दिया है कि वह मराठी मुद्दों पर ही उद्धव ठाकरे का समर्थन करने के लिए विजय रैली में शामिल हुए थे।
राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से भी कहा है कि चुनाव में साथ आने का फैसला BMC और नगर पालिका चुनावों के समय पर लिया जाएगा, जो इसी साल नवंबर-दिसंबर में होने हैं। इधर राज ठाकरे भी नफा-नुकसान की गणना कर रहे हैं और आकलन कर रहे हैं कि उद्धव ठाकरे के साथ जाने से उनकी पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) को क्या फायदा होगा।
