Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 5 October 2026 Panchang: 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। दशमी तिथि रात 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, इसके बाद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन दशमी श्राद्ध है। आज चंद्रमा पूरे दिन कर्क राशि में रहेंगे। पुष्य नक्षत्र रात 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। आज शिव योग सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक रहेगा और इसके बाद सिद्ध योग शुरू होगा।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
5 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 3 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 1 बजकर 47 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर रहेगा। दिनमान 11 घंटे 46 मिनट 37 सेकंड और रात्रिमान 12 घंटे 13 मिनट 55 सेकंड रहेगा। मध्याह्न का समय दोपहर 12 बजकर 9 मिनट पर होगा।
5 अक्टूबर 2026 की तिथि
आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। दशमी तिथि 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। सोमवार होने के कारण आज शिव पूजा और भगवान शिव से जुड़े धार्मिक कार्यों के लिए दिन विशेष रहेगा।
आज का नक्षत्र
5 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र रात 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। पुष्य नक्षत्र के दूसरे पद में सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक, तीसरे पद में शाम 5 बजकर 24 मिनट तक और चौथे पद में रात 11 बजकर 9 मिनट तक चंद्रमा रहेंगे। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र का पहला पद शुरू होगा।
आज का योग और करण
आज सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक शिव योग रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग लग जाएगा। करण की बात करें तो वणिज करण दोपहर 2 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विष्टि करण शुरू होगा, जो 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। इसके बाद बव करण लगेगा।
आज की चंद्र राशि और सूर्य राशि
5 अक्टूबर को चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। सूर्य कन्या राशि में स्थित हैं। सूर्य का नक्षत्र हस्त है और सूर्य हस्त नक्षत्र के तीसरे पद में रहेंगे। कर्क राशि में चंद्रमा रहने से दिनभर मन, भावनाओं और पारिवारिक विषयों का प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।
आज का पक्ष और चंद्र मास
आज कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। पूर्णिमांत गणना के अनुसार आश्विन मास चल रहा है, जबकि अमांत गणना के अनुसार भाद्रपद मास है। विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थी और शक संवत 1948 पराभव है। गुजराती संवत के अनुसार 2082 पिङ्गल वर्ष चल रहा है।
ऋतु और अयन
द्रिक गणना के अनुसार आज शरद ऋतु है, जबकि वैदिक गणना में वर्षा ऋतु मानी गई है। सूर्य दक्षिणायण में हैं। आज दिनमान 11 घंटे 46 मिनट 37 सेकंड और रात्रिमान 12 घंटे 13 मिनट 55 सेकंड रहेगा।
5 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:27 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:03 बजे से 6:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:07 बजे से 2:54 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:03 बजे से 6:27 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 6:03 बजे से 7:16 बजे तक
- अमृत काल: शाम 5:02 बजे से 6:34 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:45 बजे से 12:34 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:16 बजे से रात 11:09 बजे तक
5 अक्टूबर के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: सुबह 7:44 बजे से 9:13 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 1:38 बजे से 3:06 बजे तक
- विडाल योग: सुबह 6:16 बजे से रात 11:09 बजे तक
- वर्ज्य: सुबह 7:52 बजे से 9:24 बजे तक
- ज्वालामुखी योग: रात 11:09 बजे से 6 अक्टूबर की रात 2:07 बजे तक
- गण्ड मूल: रात 11:09 बजे से 6 अक्टूबर की सुबह 6:17 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक और दोपहर 2:54 बजे से 3:41 बजे तक
- भद्रा: दोपहर 2:58 बजे से 6 अक्टूबर की रात 2:07 बजे तक
आज का दिशा शूल
5 अक्टूबर को सोमवार होने के कारण दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। चंद्रमा उत्तर दिशा में रहेंगे और राहु वास उत्तर-पश्चिम दिशा में रहेगा। यात्रा या किसी महत्वपूर्ण काम की योजना बनाते समय इनका ध्यान रखा जा सकता है।
आज का निवास और शूल
आज होमाहुति राहु में है। अग्निवास 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक पृथ्वी पर रहेगा और इसके बाद आकाश में रहेगा। शिववास 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक क्रीड़ा में रहेगा और उसके बाद कैलाश पर रहेगा। भद्रावास दोपहर 2 बजकर 58 मिनट से 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक मृत्यु में रहेगा।
आनंदादि योग और तमिल योग
आज आनंदादि योग में धाता/प्रजापति का प्रभाव रात 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सौम्य योग शुरू होगा। तमिल योग के अनुसार रात 11 बजकर 9 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा और इसके बाद भी सिद्ध योग का प्रभाव रहेगा। आज जीवनम अर्ध और नेत्रम एक नेत्र है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
