महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र से के श्मशान स्थल पर बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। इस मामले ने विकास की परिभाषा और शहरी नियोजन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महानगर पालिका द्वारा श्मशान स्थल पर बच्चों के झूले लगवाने से स्थानीय लोगों में गुस्सा और हैरानी दोनों देखने को मिल रही है। बता दें कि यह घटना वसई पश्चिम के एक श्मशान परिसर की है, जहां आमतौर पर अंतिम संस्कार की शांति रहती है। लेकिन हाल ही में वहां बच्चों के झूले और खेल के उपकरण लगाए गए, जिससे स्थानीय निवासियों को गहरा धक्का लगा।
फोटो वायरल होने के बाद हटाए गए झूले
श्मशान स्थल में बच्चों के झूले लगे होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। फोटो के वायरल होने के बाद प्रशासन को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ और एक सप्ताह के भीतर यहां लगे सारे झूले हटा दिए गए। लेकिन श्मशान स्थल में बच्चों के झूले क्यों लगाए और ऐसा फैसला प्रशासन ने क्या सोच कर लिया, ये सवाल अभी भी बना हुआ है।
प्रशासन पर जानबूझकर श्मशान में झूलने लगाने का लगा आरोप
इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों का आरोप है कि झूले लगाने के लिए पास में एक खेल मैदान था, जिसका उपयोग किया जा सकता था। लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर श्मशान को चुना। इतना ही नहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने इसे फंड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि सिर्फ बजट खर्च दिखाने के लिए यह कदम उठाया गया। बता दें कि वसई-विरार महानगरपालिका पिछले पांच वर्षों से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बिना ही अफसरशाही के जरिए संचालित हो रही है। नागरिकों का आरोप है कि बिना जनसंवाद या किसी सार्वजनिक सुझाव के फैसले थोपे जा रहे हैं, जिससे ना केवल संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि जनभावनाओं की भी अनदेखी की जा रही है।
