Housing Market Trend : भारत का हाउसिंग मार्केट अब एक नए दौर में पहुंच गया है। अब कोई शहर बड़ा महानगर है, सिर्फ यही घर खरीदने की सबसे बड़ी वजह नहीं रह गई है। अब बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, किफायती कीमतें और मजबूत कनेक्टिविटी तय कर रही हैं कि किस शहर में घरों की मांग बढ़ेगी। मैजिकब्रिक्स प्रॉपइंडेक्स रिपोर्ट (Magicbricks PropIndex Report) के मुताबिक अप्रैल से जून 2026 के बीच देशभर में आवासीय संपत्तियों की मांग तिमाही आधार पर 1.2% घटी, लेकिन कोलकाता, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पुणे जैसे शहरों में खरीदारों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी। यह संकेत है कि अब खरीदार सोच-समझकर ऐसे शहर चुन रहे हैं, जहां भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो।
| हाउसिंग मार्केट रिपोर्ट: एक नजर में | आंकड़े / ट्रेंड |
|---|---|
| देशभर में कुल हाउसिंग डिमांड | -1.2% (तिमाही आधार पर) |
| देशभर में नई सप्लाई | +1.2% |
| औसत घरों की कीमत | +1.0% |
| सबसे ज्यादा मांग वाला शहर | कोलकाता (+7.5%) |
| सबसे तेज कीमत बढ़ने वाला शहर | ग्रेटर नोएडा (+1.9%) |
| सबसे बड़ा ट्रेंड | इंफ्रास्ट्रक्चर वाले शहरों की ओर बढ़ रहे खरीदार |
| खरीदारों की पहली पसंद | 2 बीएचके (42%) |
| डेवलपर्स का सबसे बड़ा फोकस | 3 बीएचके (46% सप्लाई) |
रिपोर्ट में शामिल 13 शहरों में कोलकाता ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। यहां घरों की मांग तिमाही आधार पर 7.5% बढ़ी। इसके बाद नोएडा में 5.5%, ग्रेटर नोएडा में 4.1% और पुणे में 2.1% की मांग रही।
इसके उलट कई बड़े महानगरों में मांग कमजोर पड़ी। हैदराबाद में मांग 6%, चेन्नई में 5.8%, नई दिल्ली में 2.9% और बेंगलुरु में 1.8% घटी। वहीं, मुंबई का बाजार लगभग स्थिर रहा और यहां केवल 0.6% की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
| शहर | घरों की मांग (QoQ) | नई सप्लाई (QoQ) | कीमतों में बदलाव (QoQ) | क्या संकेत मिलता है? |
|---|---|---|---|---|
| कोलकाता | +7.5% | +1.7% | +1.0% | सबसे तेज मांग, किफायती बाजार |
| नोएडा | +5.5% | -0.6% | लगभग स्थिर | मांग बढ़ी, इन्वेंट्री तेजी से बिक रही |
| ग्रेटर नोएडा | +4.1% | उल्लेख नहीं | +1.9% | कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी |
| पुणे | +2.1% | -0.9% | लगभग स्थिर | मजबूत मांग, सीमित नई सप्लाई |
| मुंबई | +0.6% | उल्लेख नहीं | उल्लेख नहीं | बाजार लगभग स्थिर |
| बेंगलुरु | -1.8% | +3.7% | +1.9% | सप्लाई बढ़ी, मांग घटी |
| हैदराबाद | -6.0% | +2.9% | +2.4% | मांग कमजोर, कीमतें फिर भी बढ़ीं |
| चेन्नई | -5.8% | उल्लेख नहीं | उल्लेख नहीं | मांग में गिरावट |
| नई दिल्ली | -2.9% | उल्लेख नहीं | उल्लेख नहीं | खरीदारों की रुचि घटी |
| गुरुग्राम | उल्लेख नहीं | +3.1% | +1.8% | डेवलपर्स का भरोसा कायम |
सप्लाई में भी दिखा बदलाव
आवासीय परियोजनाओं की सप्लाई के आंकड़ों में भी यही बदलाव देखने को मिला। देशभर में नए घरों की सप्लाई तिमाही आधार पर 1.2% बढ़ी। सबसे ज्यादा नई सप्लाई बेंगलुरु में 3.7% बढ़ी है। इसके बाद गुरुग्राम में 3.1%, हैदराबाद में 2.9% और कोलकाता 1.7% की ग्रोथ हुई है।
लेकिन, नोएडा में 0.6% और पुणे में 0.9% सप्लाई कम हुई है। जबकि इन शहरों में मांग तेजी से बढ़ी। इससे संकेत मिलता है कि यहां उपलब्ध घर तेजी से बिक रहे हैं और बाजार की स्थिति मजबूत हो रही है।
ग्रेटर नोएडा में सबसे तेज बढ़ीं कीमतें
देशभर में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में औसतन 1% की तिमाही बढ़ोतरी दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा देश का सबसे तेजी से महंगा होने वाला प्रमुख आवासीय बाजार बनकर उभरा। यहां कीमतों में 1.9% की बढ़ोतरी हुई। यह दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का सीधा असर घरों की मांग और कीमतों पर पड़ रहा है।
कोलकाता में कीमतें 1% बढ़ीं, जबकि नोएडा और पुणे में बढ़ती मांग के बावजूद कीमतें लगभग स्थिर रहीं। इससे इन शहरों की किफायती पहचान बरकरार रही। वहीं हैदराबाद (2.4%), बेंगलुरु (1.9%) और गुरुग्राम (1.8%) में मांग कमजोर रहने के बावजूद कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही। इससे पता चलता है कि डेवलपर्स को इन बाजारों की लंबी अवधि की संभावनाओं पर भरोसा बना हुआ है।
किस तरह के घर खरीद रहे हैं लोग?
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खरीदारों की पहली पसंद आज भी 2 बीएचके और 3 बीएचके घर हैं। कुल मांग में 2 बीएचके की हिस्सेदारी 42 फीसदी रही, जबकि 3 बीएचके की हिस्सेदारी 37 फीसदी रही। यानी लगभग 79 फीसदी खरीदार इन्हीं दो श्रेणियों के घर तलाश रहे हैं। दूसरी तरफ डेवलपर्स बड़े घरों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। कुल उपलब्ध सप्लाई में 3 बीएचके घरों की हिस्सेदारी 46 फीसदी रही। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में बड़े और बेहतर सुविधाओं वाले घरों की मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
हाउसिंग मार्केट का नया पता
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भारत का हाउसिंग मार्केट अब पारंपरिक महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज कनेक्टिविटी, रोजगार के नए केंद्र और अपेक्षाकृत किफायती कीमतें उन शहरों को नई पहचान दे रही हैं, जिन्हें कुछ साल पहले तक दूसरे विकल्प के तौर पर देखा जाता था।
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