मुंबई

Mumbai Holi: यहां खेली जाएगी आखिरी होली! शूट-बूट में दहन होगा अपराध-भ्रष्टाचार; थीम बेहद खास

Worli BDD Chawl Holi: महाराष्ट्र के मुंबई स्थित बीडीडी चॉल पर इस वर्ष होली पर जलाने के लिए 'टॉरस घोटाले' पर आधारित 50 फुट ऊंचा पुतला बनाया गया है। इस साल का होलिका दहन इस चॉल का आखिरी होगा, क्योंकि आने वाले महीनों में बीडीडी चॉल को पुनर्विकास के लिए तोड़ा जाएगा।

Image

वर्ली बीडीडी चॉल की होली

Worli BDD Chawl Holi: मुंबई के वर्ली स्थित बीडीडी चॉल नंबर 78 और 79 में वीर नेताजी क्रीड़ा मंडल द्वारा इस वर्ष होली पर 50 फुट ऊंचा पुतला बनाया गया है। यह पुतला 'टॉरस घोटाले' पर आधारित है, जिसे गुरुवार को जलाया जाएगा। पिछले 42 वर्षों से होली मिंट मंडल बुरी आदतों और भ्रष्टाचार के प्रतीक स्वरूप प्रतिमाएं बनाकर उनका दहन करता आ रहा है। इस वर्ष यह समारोह बहुत खास होगा, क्योंकि इस साल का होलिका दहन इस चॉल का आखिरी होगा, क्योंकि आने वाले महीनों में बीडीडी चॉल को पुनर्विकास के लिए तोड़ा जाएगा। होलिका दहन पुतले की बात करें तो इसमें एक सूट-बूट पहने शख्स को दर्शाया गया है, जिसके हाथों में हीरा और बिखरे नोट हैं। 2024 में होलिका दहन का थीम रेप एक श्राप रखा था।

जुमे की नमाज के लिए खास अपील

इस बीच, शहर में कई नागरिक संगठन और हाउसिंग सोसाइटी पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो रही हैं। लोग अब होलिका दहन के लिए हरे-भरे पेड़ों की शाखाएं काटने की जगह सूखी टहनियां इकट्ठा कर रहे हैं। होली पर गुलाल और रंगों की खरीद को लेकर भी लोग सतर्क हो रहे हैं। बाजार में कई सस्ते रंग 'ऑर्गेनिक' और 'हर्बल' के नाम से बेचे जा रहे हैं। बता दें कि शुक्रवार (14 मार्च) को होली का त्योहार मनाया जाएगा। उसी दिन जुमे की नमाज भी पढ़ी जाएगी। इसे लेकर कुछ बयानबाजियां भी हो रही हैं। हालांकि, लोगों से शांतिपूर्वक होली और रमजान मनाने की अपील की गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article