Daya Nayak: एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक को आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) से मुंबई पुलिस में तबादला कर दिया गया है। खबरों के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक ने दया नायक और सात अन्य इंस्पेक्टरों के तबादले का आदेश जारी किया है। ज्ञानेश्वर वाघ और दौलत साल्वे का भी एटीएस से मुंबई पुलिस में तबादला किया गया है।
विवादों के चलते हुए थे सस्पेंड
राज्य कैडर के 1995 बैच के अधिकारी दया नायक मुंबई में महाराष्ट्र एटीएस (आतंकवाद विरोधी दस्ते) के साथ थे और जुहू में स्थित इस यूनिट को लीड करते थे। विवादों में रहे नायक को पहले अनुशासनात्मक आधार पर निलंबित किया जा चुका है। 2006 में पूर्व पत्रकार केतन तिरोड़कर की शिकायतों के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद नायक लगभग साढ़े छह साल तक निलंबित रहे थे। आरोप था कि उनकी संपत्ति आय से अधिक है और कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड से उनका लिंक था।
2009 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एसएस विर्क ने यह कहते हुए नायक के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके बाद उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत उसके खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्हें जून 2012 में सेवा में बहाल कर दिया गया और विभाग के एक स्थानीय शस्त्र शाखा में तैनात कर दिया गया था। थोड़े समय के लिए तैनाती के बाद उन्हें शहर में एक हाई-प्रोफाइल जोन माने जाने वाले पश्चिम क्षेत्र (बांद्रा से अंधेरी) में तबादला कर दिया गया।
तबादले और निलंबन का दौर
इसके बाद 2014 में नायक के खिलाफ जांच लंबित होने के कारण उनका नागपुर तबादला कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने वहां ड्यूटी ज्वाइन नहीं की थी। नायक ने कथित तौर पर राज्य सरकार और डीजीपी दोनों को पत्र भेजे थे, जिसमें खतरों का हवाला देते हुए कहा था कि वह अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा चिंताओं के कारण नागपुर नहीं जा सकते हैं। हालांकि, 2015 में उन्हें नागपुर में रिपोर्ट नहीं करने के लिए फिर से निलंबित कर दिया गया, जहां से एक साल पहले उनका तबादला हो गया था। निलंबन का आदेश महाराष्ट्र के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजीव दयाल की ओर से आया था।
नायक को 2016 में राज्य सरकार द्वारा पुलिस सेवा में बहाल किया गया था। 2021 में उन्हें महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में ट्रांसफर कर दिया गया था। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी तबादले आदेश के अनुसार, नायक को जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति से संबद्ध किया गया था। उन्होंने तबादला आदेश को चुनौती देते हुए महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एमएटी) का रुख किया।
दया नायक ने किए कई एनकाउंटर
दया नायक ने 1990 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड गतिविधियों के चरम पर होने के दौरान ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में प्रसिद्धि हासिल की थी। उन्होंने अपने करियर के दौरान 80 से अधिक गैंगस्टरों को मार गिराने का दावा किया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे। साथ ही कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड से उनके लिंक की खबरें भी सुर्खियां बनी थीं। 1990 के दौर में नायक के नाम से गैंगस्टर घबराने लगे थे। आए दिन वह अखबारों की सुर्खियों में नजर आने लगे थे। उनके कुल एनकाउंटर की गिनती होने लगी, मुंबई पुलिस के दूसरे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के साथ नंबरों की होड़ भी खूब चली। लेकिन, एक ऐसा दौर भी आया जब वह आरोपों के चलते सस्पेंड हुए और उनकी खूब बदनामी हुई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां उनके खिलाफ लगे आरोप खारिज किए गए।
