सीएम फडणवीस ने बताया कि आने वाले वर्षों में मुंबई क्षेत्र के मौजूदा 91 किलोमीटर लंबे मेट्रो नेटवर्क में 280 किलोमीटर से अधिक नई लाइनों को जोड़ा जाएगा। इसमें अगले दो वर्षों में 132 किलोमीटर और उसके बाद 151 किलोमीटर मेट्रो लाइनें शुरू की जाएंगी। इससे पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार मुंबई-कल्याण-लातूर-हैदराबाद पब्लिक यूटिलिटी एक्सप्रेसवे पर काम कर रही है। इस परियोजना से मुंबई और हैदराबाद के बीच दूरी 130 किलोमीटर कम होकर 590 किलोमीटर रह जाएगी। वहीं मुंबई से लातूर का सफर महज 4.5 घंटे में पूरा हो सकेगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत, अनुशासित और निवेश के अनुकूल बनी हुई है। राज्य का सार्वजनिक कर्ज सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 18.87 प्रतिशत है, जो RBI की तय सीमा 25 प्रतिशत से काफी कम है। गुजरात और ओडिशा के साथ महाराष्ट्र उन गिने-चुने राज्यों में शामिल है, जिनका कर्ज 20 प्रतिशत से नीचे है।
फडणवीस ने बताया कि ‘लाडकी बहिन’ योजना और किसानों को मुफ्त बिजली जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद राज्य का वित्तीय घाटा 3 प्रतिशत से नीचे रखा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ये योजनाएं पूरे पांच साल तक जारी रहेंगी।
सीएम ने बताया कि महाराष्ट्र फॉरेन डाइरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) के मामले में देश में अग्रणी बना हुआ है। वर्ष 2024-25 में राज्य को 1.6 लाख करोड़ रुपये का FDI मिला, जबकि 2025-26 की पहली दो तिमाहियों में 91,337 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह देश के कुल FDI का करीब 31 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं होंगे। जो उपभोक्ता स्वेच्छा से स्मार्ट मीटर लगवाएंगे, उन्हें बिजली बिल में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि मुंबई हमेशा महाराष्ट्र का अभिन्न हिस्सा रहेगी और इसके अलग होने की अटकलों का कोई आधार नहीं है।
फडणवीस ने कहा कि 2022 के बाद दावोस में हुए 17.6 लाख करोड़ रुपये के समझौतों में से 75 प्रतिशत पर अमल हो चुका है। कंपोजिट इंसेंटिव स्कीम के तहत 13.8 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर काम चल रहा है, जिससे करीब 7.1 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।