Indore Water Contamination: मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में स्वीकार किया कि शहर के भगीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान सात लोगों की मौत हुई है। मृतकों में एक पांच महीने का शिशु भी शामिल है। हालांकि सरकार की ओर से दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट में मौतों की वजह बनी बीमारी को स्पष्ट नहीं किया गया है।
158 पन्नों की रिपोर्ट, बीमारी स्पष्ट नहीं
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष 158 पृष्ठों की स्थिति रिपोर्ट पेश की गई। यह रिपोर्ट दूषित पेयजल से कथित मौतों को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दाखिल की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच सात लोगों की मौत हुई। इनमें चार की मौत इलाज के दौरान हुई, जबकि एक व्यक्ति अस्पताल लाए जाने से पहले ही मृत पाया गया। दो मामलों में मौत का कारण 'अज्ञात' बताया गया है।
सरकारी दावे और स्थानीय लोगों के आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की ओर से मौखिक रूप से 23 मौतों की जानकारी दी गई और यह भी स्वीकार किया गया कि कम से कम 15 मौतें दूषित पानी से जुड़ी हो सकती हैं। स्थानीय निवासियों का भी दावा है कि जल संकट के चलते मौतों की संख्या सात से कहीं अधिक है।
प्रशासनिक कदम और अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने बताया कि इलाके में टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और दूषित पाए गए 51 ट्यूबवेल बंद कर दिए गए हैं। साथ ही 1.62 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। सरकार के अनुसार, 440 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिनमें से अधिकांश को छुट्टी मिल चुकी है। अदालत ने सभी पक्षों को रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने और 20 जनवरी को अगली सुनवाई में फिर से मुख्य सचिव की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
