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ममता बनर्जी की सेक्युरिटी में तैनात दो PSO हटे, पूर्व CM ने जताई नाराजगी; बोलीं- अब नहीं चाहिए कोई सुरक्षा

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में हुए अचानक बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनके साथ वर्षों से तैनात दो भरोसेमंद PSO को हटाए जाने के बाद उन्होंने नाराजगी जताते हुए सुरक्षा लेने से ही इनकार कर दिया।

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

Photo : PTI

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। उनकी सुरक्षा में लंबे समय से तैनात दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) कुसुम कुमार द्विवेदी और स्वरूप गोस्वामी को सुरक्षा ड्यूटी से हटाकर वापस पश्चिम बंगाल पुलिस में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी 20 साल से भी अधिक समय से ममता बनर्जी की सुरक्षा टीम का हिस्सा थे और मुख्यमंत्री बनने से पहले से ही उनके साथ तैनात थे।

किसी भी तरह की सुरक्षा की जरूरत नहीं

सूत्रों के अनुसार, डायरेक्टर सिक्योरिटी की ओर से उनकी जगह दो नए PSO को नियुक्त कर पूर्व मुख्यमंत्री के आवास भेजा गया। हालांकि, इस बदलाव से ममता बनर्जी नाराज हो गईं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने असंतोष जताते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

ममता बनर्जी हुईं नाराज

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि ममता बनर्जी के आवास पर असामान्य सन्नाटा है और वहां फिलहाल कोई सुरक्षा अधिकारी मौजूद नहीं है। वहीं, कोलकाता पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अपने लंबे समय से तैनात PSO को हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद ममता बनर्जी काफी नाराज हो गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने आवास पर ड्यूटी कर रहे अन्य सुरक्षा कर्मियों को भी वहां से जाने के लिए कह दिया, जिसके चलते उनके घर पर सुरक्षा व्यवस्था अस्थायी रूप से प्रभावित हो गई।

19 जून को ममता बनर्जी गुट के लिए अहम दिन

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी में विभाजन के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए 19 जून को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। TMC के सूत्रों ने बताया कि पार्टी को बुधवार शाम पांच बजे लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से इस संबंध में ईमेल प्राप्त हुआ। अभिषेक बनर्जी शुक्रवार शाम बिरला से मुलाकात करेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करने के बाद खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

ओम बिरला ने इस मामले में कोई निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का फैसला किया है। अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत प्रदान नहीं की जाए। बनर्जी ने पत्र में कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के गठन की अनुमति नहीं देते।

पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को बिरला के आवास पर जाकर यह पत्र उन्हें सौंपा था। बनर्जी ने अपने पत्र में कहा था, "तृणमूल कांग्रेस को सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र राजनीतिक दल के रूप में माना जाए तथा किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत देने से इनकार किया जाए।" उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव करने का रास्ता नहीं बचा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक समूचे राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों को। उन्होंने यह भी कहा था, "अगर इस प्रकार का कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उसपर कोई भी निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।" संसदीय सूत्रों ने कहा कि ओम बिरला इस मामले में कानून, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय लेंगे।

Pooja Mehta
पूजा मेहताauthor

पूजा मेहता एक वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार हैं, जिन्हें रिपोर्टिंग का लगभग 15 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, आंतरिक संघर्ष, रक्षा, पर्यावरण और अपराध पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों पर गहरा फोकस रखते हुए। संघर्षग्रस्त इलाकों से उनकी ज़मीनी रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों की गहन समझ उन्हें पैनी दृष्टि और विश्वसनीय विश्लेषण के लिए अलग पहचान दिलाती है। वह प्रमाणित Defence Correspondent हैं और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रतिष्ठित International Visitor Leadership Program (IVLP) की एलुमनी भी हैं, जिससे विदेशी नीति, सुरक्षा और सामरिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई है।

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