लखनऊ

UP Nikay Chunav: जानें कब हो सकते हैं यूपी निकाय चुनाव, ओबीसी आरक्षण पर 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2023, 12:03 AM IST

ओबीसी आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर अगर सुप्रीम कोर्ट सहमति जताता है, तो निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा। माना जा रहा है कि इसके बाद मई में चुनाव कराए जा सकते हैं।

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यूपी निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट में 24 मार्च को होगी सुनवाई

Photo : PTI

UP Nagar Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं, जहां 24 मार्च को इस मामले को लेकर सुनवाई होने वाली है। दरअसल, निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग ने कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। बता दें, शीर्ष अदालत ने चार जनवरी, 2023 को ओबीसी आरक्षण दिए बिना निकाय चुनावों पर रोक लगा दी थी।

रिपोर्ट में मिली कई विसंगतियां

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया, आयोग ने पांच दिसंबर, 2022 को अधिसूचित निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर कई विसंगतियां पाई हैं और उन्हें दूर करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने इस मामले को 24 मार्च को विचार के लिए रखा है।

तो निकाय चुनाव का रास्ता हो जाएगा साफ

अब सुप्रीम कोर्ट अगर ओबीसी आयोग की इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है और उस पर कोई आपत्ति नहीं करता है, तो जल्द ही यूपी निकाय चुनाव का रास्ता भी साफ हो जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि कोर्ट की सहमति के बाद अप्रैल में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी की जा सकती है और मई में चुनाव कराए जा सकते हैं।

भाजपा ने बनाया बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश निकाय को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा प्लान बनाया है। भाजपा ओबीसी मोर्चा चुनाव से पहले छह से 14 मार्च के बीच एक अभियान चलाएगी। इसके तहत प्रदेश पदाधिकारी पांच से 10 गांवों में घर-घर चलो, गांव-गांव चलो अभिान चलाएंगे और भाजपा की विचारधारा और सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करेंगे।

आम आदमी पार्टी भी अजमाएगी किस्मत

यूपी निकाय चुनाव की रेस इस बार रोचक होनी वाली है। दरअसल, अभी तक सीधा मुकाबला भाजपा और सपा के ही बीच माना जा रहा था, लेकिन अब आम आदमी पार्टी ने भी 633 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। पार्टी ने हाउस टैक्स और वाटर टैक्स माफ करने की घोषणा की है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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