लखनऊ

माफिया अतीक की फैमिली से BSP ने किया किनारा, मायावती ने फरार पत्नी शाइस्ता का टिकट काटा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 10, 2023, 02:41 PM IST

UP Nikay Chunav 2023: माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन उमेश पाल हत्याकांड से करीब दो महीने पहले बसपा में शामिल हुई थीं। उन्हें बसपा ने प्रयागराज नगर निकाय सीट से मेयर उम्मीदवार बनाया था।

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बसपा ने शाइस्ता परवीन का टिकट काटा

Photo : PTI

Mafia Atiq Ahmed: उमेश पास हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले प्रयागराज की अदालत ने राजू पाल अपहरण में अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई। अब सामने आया है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अतीक अहमद की फरार पत्नी शाइस्ता परवीन का निकाय चुनाव से टिकट भी काट दिया है। इतना ही नहीं मायावती ने ऐलान किया है कि बसपा अतीक अहमद के परिवार के किसी भी सदस्य को टिकट नहीं देगी।

मायावती ने यह फैसला उमेश पाल हत्याकांड में शाइस्ता परवनी का नाम सामने आने के बाद किया है। फिलहाल शाइस्ता फरार हैं और पुलिस ने उनके सिर पर 50 हजार का इनाम घोषित किया है। पहले शाइस्ता पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन अब पुलिस ने इनाम की राशि बढ़ा दी है।

पहले बसपा ने ही दिया था शाइस्ता को टिकट

बता दें, उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव का ऐलान हो चुका है। ऐसे में सभी की निगाहें बहुचर्चित प्रयागराज नगर निगम चुनाव पर हैं। दरअसल, उमेश पाल हत्याकांड से करीब दो महीने पहले ही अतीक की पत्नी शाइस्ता बसपा में शामिल हुई थीं। इसके बाद बसपा ने शाइस्ता परवीन को ही टिकट देकर मेयर उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि बसपा एक बार फिर उन्हें मेयर चुनाव लड़ने का ऑफर दे सकती है।

मायावती ने खुद किया ऐलान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मायावती ने कहा है किउमेश पाल हत्याकांड में अतीक की पत्नी का नाम सामने आने के बाद स्थिति बदल गई है। ऐसी में हमारी पार्टी न ही अतीक की पत्नी और न ही उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य को मेयर का टिकट देगी। वहीं शाइस्ता के बसपा में रहने के सवाल पर मायावती ने जवाब दिया कि इस मामले में शाइस्ता की गिरफ्तारी के बाद फैसला लिया जाएगा।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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