लखनऊ

विदेश भागने की फिराक में अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन और बमबाज गुड्डू, लुकआउट नोटिस जारी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 16, 2023, 09:56 AM IST

Umesh Pal Murder case: उमेश पाल की हत्या के बाद से शाइस्ता परवीन फरार चल रही है। पुलिस ने उसके सिर पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा है। वहीं गुड्डू मुस्लिम भी फरार है। उसके ऊपर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

Umesh Pal Murder case: उमेश पाल हत्याकांड में फरार आरोपी अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, शूटब साबिर और बमबाज गुड्डू मुस्लिम के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। पुलिस को शक है कि दोनों विदेश भाग सकते हैं। ऐसे में लुकआउट नोटिस जारी कर देश के सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्टों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

बता दें, उमेश पाल की हत्या के बाद से शाइस्ता परवीन फरार चल रही है। पुलिस ने उसके सिर पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा है। वहीं गुड्डू मुस्लिम भी फरार है। उसके ऊपर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उमेश पाल हत्याकांड में बम फेंकते हुए गुड्डू मुस्लिम का वीडियो सामने आया था।

मुंबई में छुपे होने की संभावना

उत्तर प्रदेश पुलिस को इनपुट मिले हैं कि शाइस्ता परवनी और गुड्डू मुस्लिम मुंबई में छिपे हो सकते हैं और दोनों वहीं से विदेश भागने की तैयारी में हैं। ऐसे में लुकआउट नोटिस जारी कर दोनों की मुंबई में तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में दोनों की तलाश के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की है।

बेटे असद का हो चुका है एनकाउंटर

बता दें, उमेश पाल हत्याकांड में अतीक और शाइस्ता के बेटे असद के साथ शूटर गुलाम, अरबाज और उस्मान चौधरी का एनकाउंटर हो चुका है। वहीं अतीक और उसके भाई अशरफ की भी गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। पुलिस को उम्मीद थी कि अतीक की हत्या के बाद शाइस्ता सामने आएगी, लेकिन अभी तक उसका कुछ पता नहीं चला है। वहीं, इस मामले में पांच लाख के इनामी शूटर अरमान ने बिहार के सासाराम कोर्ट में समर्पण कर दिया है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद वह सासाराम भाग गया था। बता दें, प्रयागराज के धूमनगंज में 24 फरवरी की शाम उमेश पाल की सरेआम हत्या कर दी गई थी। इस घटना में उमेश की सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की भी हत्या हुई थी। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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