लखनऊ

श्रीराम का आशीर्वाद हमारे साथ, इसलिए हमें मिला धनुष-बाण, रामलला के दर्शन से पहले बोले महाराष्ट्र के सीएम शिदें

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 9, 2023, 11:55 AM IST

महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के साथ उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस व हजारों शिवसैनिक अयोध्या पहुंचे हैं। वह यहां रामलला के दर्शन करेंगे।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

Photo : BCCL

Eknath Shinde in Ayodhya: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे रविवार को अयोध्या पहुंच गए हैं। वह यहां रामलला के दर्शन करेंगे। उनके साथ डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस व कैबिनेट के अन्य मंत्री भी मौजूद हैं। रामलला के दर्शन से पहले सीएम शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष किया।

मीडिया से बात करते हुए सीएम शिंदे ने कहा, प्रभु रामचंद्र जी का आशीर्वाद हमारे साथ ही है, इसलिए उनका धनुष-बाण हमें मिला है। वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, मैं राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा हूं। मैं सभी कारसेवाओं में भी उपस्थित रहा हूं। बहुत दिनों से रामलला के दर्शन करने की इच्छा थी, आज बहुत खुशी है कि मैं उनके दर्शन करने जा रहा हूं।

शिंदे के साथ पहुंचे हजारों शिवसैनिक

सीएम एकनाथ शिंदे के महाराष्ट्र से अयोध्या पहुंचने से पहले हजारों की संख्या में शिवसैनिक यहां पहुंच गए हैं। रविवार को यहां पहुंचते ही सीएम एकनाथ शिंदे का भव्य स्वागत किया गया। एकनाथ शिंदे के स्वागत में आयोध्या में हार्दिक स्वागत और अयोध्या चलो के कई पोस्टर भी लगाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद दिया।

संजय राउत ने भाजपा पर साधा निशाना

उधर, उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, धर्म के नाम पर ये जो चल रहा है, मैं उसका विरोध नहीं कर रहा हूं। हम भी प्रभु श्रीराम पर आस्था रखते हैं। मैं तो कई बार जा चुका है। लेकिन ये भाजपा के लोग कभी हमारे साथ तो नहीं आए थे। जब बाबरी का मुद्दा हुआ था, तो ये लोग छोड़कर भाग गए थे। अब आप जा रहे हैं, आपको क्या लगाता है प्रभु श्रीराम उनको आशीर्वाद देंगे। महाराष्ट्र में बारिश हुई ओले पड़े, किसान रो रहा है। ये सब छोड़कर वहां पहुंच गए। आपको क्या लगता है ऐसे में प्रभु श्रीराम उन्हें आशीर्वाद देंगे। इतनी आस्था थी तो गुवाहाटी में न जाते भागकर, आप अयोध्या जाते। यह भाजपा ने स्पॉन्सर किया है कि अयोध्या चलो। ये हमारी कॉपी करते हैं। पब्लिक सब जानती है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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