लखनऊ

हाईकोर्ट में आधा किलो चाइनीज लहसुन लेकर पहुंचे वकील, पूछा- बैन के बाद कैसे बिक रहा? फिर क्या हुआ...

High Court in Chinese Garlic: इलाहाबाद हाईकोर्ट की हाईकोर्ट लखनऊ बेच में वकील आधा किलो चाइनीज लहसुन लेकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बैन के बाद भी ये कैसे बिक रहा है। इसके बाद कोर्ट के बुलावे पर अफसर पहुंचे और उन्होंने जज के सामने लहसुन को सीज किया। आपको सारा माजरा समझाते हैं।

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अदालत में उठा प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन के बिकने का मामला।

Lucknow News: चाइनीज लहसुन की भारत में एक बार फिर से अवैध रूप से एंट्री होने का मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिकाकर्ता आधा किलो लहसुन खरीद कर पेश किया और कहा कि जब 2014 चाइनीज लहसुन भारत में प्रतिबंधित है तो यह कैसे बाजार में बिक रहा है। कोर्ट के बुलावे पर शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी जज के सामने पेश हुए और चाइनीज लहसुन को सीज किया।

प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन को रोकने के लिए क्या तंत्र है?

गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अधिवक्ता मोती लाल यादव की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सेहत के लिए हानिकारक प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन के बाजार में धड़ल्ले से बिक्री पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा और ड्रग प्रशासन विभाग के अफसरों को तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि चाइनीज लहसुन बाजारों में कैसे खुलेआम बेचा जा रहा है? जबकि उस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। कोर्ट ने इस दौरान केंद्र सरकार के वकील से पूछा कि देश में प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन को रोकने के लिए क्या तंत्र है?

प्रतिबंध के बाद भी यह कैसे बिक रहा है चाइनीज लहसुन?

दरअसल, अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने चिनहट बाजार से आधा किलो चाइनीज लहसुन भी खरीद कर कोर्ट के सामने पेश किया था और कहा था कि प्रतिबंध के बाद भी यह कैसे बिक रहा है? इस पर न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने अफसरों को इस बाबत तलब किया था।

हाईकोर्ट में पेश हुए अधिकारी, जमकर लगाई फटकार

शुक्रवार को हाईकोर्ट में सहायक खाद्य आयुक्त विजय प्रताप सिंह पेश हुए। इस दौरान कोर्ट ने विजय प्रताप को कड़ी फटकार लगाते हुए अपने सामने ही वकील द्वारा पेश किए गए आधा किलो लहसुन को सीज करने के आदेश दिया। जिसके बाद विजय सिंह ने उसे सीज किया। अब अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।

अधिवक्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने चाइनीज लहसुन पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद देशी लहसुन से काफी सस्ता होने की वजह से यह अवैध तरीके से तस्करी होकर बाजार में बेचा जा रहा है। इस पर केंद्र व राज्य सरकारें लगाम लगाने में असमर्थ दिख रही हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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