कांशीराम की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को लखनऊ में बसपा की बड़ी रैली का आयोजन हो रहा है। इस रैली में 5 लाख की भीड़ जुटाने का मेगा प्लान है। इस रैली के लिए गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में बसपा कार्यकर्ता जुटने लगे। बसपा सुप्रीमो मायावती इस रैली को संबोधित करेंगी। कहा जा रहा है कि इस रैली के जरिए बसपा अपनी ताकत दिखाएगी। इसे मायावती के लिए 'कमबैक' रैली के तौर पर देख जा रहा है। इतना ही नही, कहा जा रहा है कि इस रैली के जरिए मायावती साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा की तैयारियों का आगाज भी करेंगी।
2027 में 2007 वाला करिश्मा दोहराने की तैयारी
लखनऊ में कांशीराम स्मारक में इस रैली का आयोजन होना है, लिहाजा तैयारियां जोरों पर हैं। यूपी के हर हिस्से से बसपा समर्थकों में लखनऊ लाने का इंतजाम किया जा रहा है। रैली में शामिल होने के लिए प्रत्येक जाति और पंथ के लोगों को आमंत्रित किया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कोने-कोने से बसपा कार्यकर्ता और समर्थक बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों के जरिए लखनऊ आ रहें है। नेता और कार्यकर्ता इसे 2027 में होने वाले चुनाव की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 2007 वाले करिश्मे को दोहरा सकती है।
लखनऊ में 18 साल बाद बसपा की महासंकल्प रैली
करीब 18 साल पहले लखनऊ में बसपा की महासंकल्प रैली की थी। एक बार फिर यह रैली होने जा रही है, जिसमें 5 लाख समर्थकों की आने की उम्मीद है। मायावती अपनी पार्टी की ताकत और संगठनात्मक क्षमता दिखाने के साथ विपक्ष को सियासी संदेश देंगी। अगर यह रैली का मैदान भर गया तो यह उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया अध्याय शुरू करने का संकेत भी दे सकती है।
रैली के जरिए BSP की सियासी रणनीति का होगा खुलासा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह रैली बसपा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकती है। हाल के वर्षों में पार्टी का प्रभाव कुछ कम हुआ है, लेकिन इस रैली के जरिए मायावती अपनी पार्टी को फिर से मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश करेंगी। रैली में दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्गों को एकजुट करने का संदेश भी दिया जाएगा। लखनऊ में 9 अक्टूबर को होने वाली यह रैली न केवल बसपा की ताकत का प्रदर्शन होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया अध्याय शुरू करने का संकेत भी दे सकती है। सभी की निगाहें अब मायावती के भाषण और उनके सियासी संदेश पर टिकी हैं।
