लखनऊ

यूपी सरकार ने बदला अपना ही आदेश, बरकरार रहेगी आजम खान की सुरक्षा; अपर्णा यादव को झटका

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 15, 2023, 11:23 AM IST

Azam Khan Security: गुरुवार को शासन ने आजम खान की सुरक्षा वापस लेते हुए कहा था कि उन्हें अब वाई श्रेणी की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। हालांकि, अब उनकी सुरक्षा को फिर से बहाल कर दिया गया है।

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आजम खान

Azam Khan Security: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना ही आदेश पलट दिया है। पहले आजम खान की वाई श्रेणी की सुरक्षा को वापस ले लिया गया था, हालांकि 24 घंटे के बाद ही सरकार ने उनकी सुरक्षा को बहाल कर दिया है।

बता दें, गुरुवार को शासन ने आजम खान की सुरक्षा वापस लेते हुए कहा था कि उन्हें अब वाई श्रेणी की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। हालांकि, रामपुर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की सिफारिश पर आजम खान को दोबारा वाई कैटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। इस मामले में सियासत भी देखी गई, जब रामपुर समाजवादी पार्टी की ओर से एक प्रेस नोट जारी किया गया था, जिसमें आजम खान परिवार को खिलाफ साजिश रचे जाने का हवाला दिया गया था।

अपर्णाा यादव को लगा झटका

वहीं, सपा से भाजपा में शामिल हुईं अपर्णा यादव को झटका लगा है। उत्तर प्रदेश शासन ने अपर्णा यादव की सुरक्षा में तैनात स्कॉर्ट वाहन को वापस ले लिया है। इसके साथ ही भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज की एक्स श्रेणी की सुरक्षा को भी वापस ले लिया गया है। शासन का कहना है कि उन्हें अब सुरक्षा दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके अलावा पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय की वाई श्रेणी की सुरक्षा को सरकार ने वापस ले लिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी सुरक्षा वापस ली गई है। उन्हें 7 नवंबर, 2019 को सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। उनको छह माह तक केवल एक गनर दिया जाएगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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