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संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा, गृह मंत्री की हाजिरी पर अड़ा विपक्ष ; लोकसभा की कार्यवाही स्थगित

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि, इस बीच हंगामे के बीच ही केरल नाम परिवर्तन विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिए गए।

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लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित (PTI)

लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजकर 25 मिनट पर दिनभर के स्थगित कर दी गई। हंगामे के बीच ही सदन ने केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया। संसद के मानसून सत्र के चौथे सप्ताह के दूसरे दिन की कार्यवाही भी पिछले तीन सप्ताह की तरह हंगामेदार रही और लगातार 17वें कार्यदिवस को भी सदन में प्रश्नकाल तथा शून्यकाल नहीं चल सके।

एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ’केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। विपक्षी दलों के सांसद अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर सदन में चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। हंगामे के बीच ही सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।

इसके बाद, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। सदन ने इस विधेयक को भी चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया। पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाकर बैठने और विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने का बार-बार आग्रह किया।

केरल का नाम बदलने पर विपक्षी सांसदों ने नहीं बोला

उन्होंने कहा कि बहुत महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो रहे हैं। आप लोग सीट पर जाकर बैठिए। तेन्नेटी ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने केरल का नाम बदलकर केरलम करने से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक पर भी नहीं बोला। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू होते ही कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दलों के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए हंगामा करने लगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी दलों से सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जब छात्रों के आंदोलन पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग पर सरकार ने सहमति दे दी है तो फिर विपक्ष को सदन चलने देना चाहिए। बिरला ने कहा कि सदन सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों को मिलकर चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता चाहती है कि सदन चले और सभी विषयों पर चर्चा हो।

उन्होंने कहा कि उन्होंने सोमवार को कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में भी सभी दलों से सदन चलाने का आग्रह किया था। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार आग्रह किया कि प्रश्नकाल सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसमें सत्ता की जवाबदेही तय होती है और कार्यपालिका में पारदर्शिता आती है।

उन्होंने विपक्ष की छात्रों से संबंधित प्रमुख मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बीएसी की बैठक में स्पष्ट किया है कि गृह मंत्री इस विषय पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। बिरला ने कहा कि आपकी प्रमुख मांग पर सरकार ने सहमति जताई है। अब आप सदन चलने दें। उन्होंने सदन के भीतर तख्तियां लाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यह संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा, ’’आप लोग सहयोग करें। सदन नहीं चलने से मन व्यथित होता है। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने 11 बजकर चार मिनट पर सदन की बैठक अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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