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'वर्ल्ड क्लास एक्सप्रेस-वे बना रिपेयर-वे'! 63 KM में गड्ढों में ढूंढ रहे सड़क; भ्रष्टाचार का नमूना बना Kanpur-Lucknow Expressway

Kanpur Lucknow Expressway: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण क्वालिटी ने सरकार के 'वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर' के दावों पर पानी फेर दिया है। 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर 45 जगहों पर सड़क धंस गई है, जिसे पैचिंग कर सुधारने का प्रयास जारी है, लेकिन खामियां पीछा नहीं छोड़ रही हैं।

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4700 करोड़ में पानी फेर गया कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे

Kanpur Lucknow Expressway : वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास की रफ्तार और आधुनिक इंजीनियरिंग का पिलर कहे जाने वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे रफ्तार का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का नायाब नमूना बनकर उभरा है। उद्घाटन के महज एक महीने के भीतर ही करीब 45 जगहों पर सड़क मार्ग धंस गया, जो लापरवाही का जीता जागता उदाहरण पेश कर रहा है। 63 किलोमीटर की लंबाई और 4700 करोड़ की लागत से विकसित किए एक्सप्रेसवे मार्ग ने तमाम दावों की पोल पट्टी खोल दी है। खराब हिस्सों पर पैचिंग का कार्य लगातार जारी है, लेकिन खामियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लगातार सरकार और निर्माण कंपनी की फजीहत हो रही है, क्योंकि केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को अमेरिका की सड़कों से तुलना की थी।

दरअसल, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर लंबे समय से लोग उत्साहित थे, क्योंकि पुराने NH-27 से मिनटों के सफर के लिए घंटों खर्च करने पड़ते थे। उद्घाटन की तारीख पर तारीख के बाद, जब यह यातायात के लिए खोला गया तो महज उद्घाटन के 21वें दिन निर्माण की पोल पट्टी खुल गई। सावन की बारिश से पहले ही एक्सप्रेसवे धंस गया। लगातार खामियां छिपाने के लिए पैचिंग वर्क जारी है, लेकिन राहत नहीं मिल रही है। हालांकि, खराब निर्माण गुणवत्ता और मेंटेनेंस में लापरवाही को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया था। एक्सप्रेसवे की पूरी मरम्मत होने तक वहां टोल वसूली पूरी तरह से बंद कर दी गई है, और इस दौरान होने वाले टोल राजस्व की भरपाई संबंधित रियायतग्राही (कंसेंशनेयर) से ही की जाएगी।

अधिकारियों पर एक्शन

NHAI की इस कार्रवाई के तहत निर्माण एजेंसी PNC इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर (अक्षम) घोषित करने का नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, कंपनी को भविष्य की NHAI परियोजनाओं की निविदाओं (टेंडर) से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है और उसकी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर 2% तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। एजेंसी को अपने खर्च पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित हिस्से की पूरी मरम्मत करनी होगी।

इंजीनियरों नपे

इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों पर भी गाज गिरी है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारियों को हटाकर उन पर दो साल का डिबारमेंट (प्रतिबंध) लगा दिया गया है। इसके अलावा, इस परियोजना से जुड़े वर्तमान और पूर्व परियोजना निदेशकों (Project Directors) पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है। गुणवत्ता की निगरानी के जिम्मेदार स्वतंत्र अभियंता, थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज को भी डिबारमेंट का नोटिस जारी किया गया है।

एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच के लिए आईआईटी (IIT) खड़गपुर के विशेषज्ञों की एक टीम को नियुक्त किया गया है, जो तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी। इसके साथ ही, आधुनिक लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक के जरिए पूरे एक्सप्रेसवे की सड़क की गुणवत्ता की दोबारा जांच की जाएगी।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की क्या है खासियत

2022 में शुरू हुई कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे परियोजना लखनऊ के शहीद पथ से शुरू होकर उन्नाव के आजाद चौराहे पर खत्म होती है। फिलहाल, इसे 6 लेन में तैयार किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में वाहनों के बोझ को देखते हुए इसको विस्तार देकर 8 लेन का भी किया जा सकता है। एनएचएआई के हवाले से एक्सप्रेसवे के काम को दो पैकेज में किया गया है। इसका पहला पैकेज 18 किलोमीटर जो लखनऊ में है और दूसरा 45 किलोमीटर लंबा पैकेज उन्नाव जिले के हिस्से में है। इस परियोजना में लखनऊ जिले के 11 और उन्नाव जिले के 31 गांव शामिल हैं। परियोजना की लागत- 4700 करोड़ रुपये है।

एक्सप्रेसवे पर लखनऊ के अलावा उन्नाव के आजाद चौराहे पर एंट्री-एग्जिट मिलती है। उधर, लालगंज (रायबरेली)-उन्नाव रोड से भी लोग एक्सप्रेसवे पर आ जा सकेंगे। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर टॉल प्लाजा पर प्रशासनिक भवन इमारतें बनेंगी। यहां यात्रियों की सुविधाओं के लिए रेस्टोरेंट और शौचालय इत्यादि की व्यवस्था की होगी। एनएचएआई के दावे के मुताबिक, एक्सप्रेसवे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। ऐसे में दोनों शहरों के बीच 63 किलोमीटर के सफर को तय करने में 35 मिनट ही लगेंगे।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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