Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सोमवार को परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले के निजी ट्रांसपोर्टरों ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल (Himachal Strike) का बिगुल फूंक दिया है। इस हड़ताल का व्यापक असर जनजीवन पर देखा जा रहा है, विशेष रूप से स्कूली बच्चों और रोजाना दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम (ATS) के खिलाफ फूटा गुस्सा
केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत वाहनों की फिटनेस और पासिंग के लिए स्थापित किए गए 'ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों' (ATS) का ट्रांसपोर्टर कड़ा विरोध कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उस 'सिस्टम' के खिलाफ है जिसमें कई व्यावहारिक खामियां हैं। उनके मुताबिक, ऑटोमेटेड प्रणाली में वाहन पासिंग के दौरान कई ऐसी तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिससे ट्रांसपोर्टरों का काम करना मुश्किल हो गया है।
स्कूलों में छुट्टी और सड़कों पर चक्का जाम की चेतावनी
हड़ताल के ऐलान के साथ ही कांगड़ा जिले के अधिकांश निजी स्कूलों ने एहतियातन आज छुट्टी घोषित कर दी है, क्योंकि स्कूल बसें और वैन सड़कों से नदारद हैं। ट्रांसपोर्टरों ने न केवल काम बंद रखा है, बल्कि विभिन्न स्थानों पर सड़क जाम करने की चेतावनी भी दी है। इससे निजी वाहनों से आवाजाही करने वाले लोगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। धर्मशाला और आसपास के प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
टैक्सी ऑपरेटरों का 'बैंड-बाजा' वाला अनोखा विरोध
धर्मशाला में विरोध प्रदर्शन का एक अनोखा नजारा देखने को मिला। यहाँ टैक्सी ऑपरेटरों ने सरकार के प्रति अपना रोष जताने के लिए 'बैंड-बाजे' का सहारा लिया। ऑपरेटरों ने बैंड की धुन पर नाचते हुए और नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है, इसलिए वे इस अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
क्या है विवाद की जड़?
उल्लेखनीय है कि पुरानी मैन्युअल व्यवस्था को बदलकर अब मशीनीकृत यानी ऑटोमेटेड स्टेशनों के जरिए वाहनों की फिटनेस जांच अनिवार्य कर दी गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में ये केंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि मशीनी जांच में छोटी-छोटी तकनीकी कमियों के कारण भी फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
