Justice Mahavir Singh Sindhu: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश न्यायमूर्ति महाबीर सिंह सिंधु का रविवार को गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 59 वर्ष के थे। अधिकारियों ने बताया कि न्यायमूर्ति सिंधु कुछ समय से अस्वस्थ थे। उच्च न्यायालय ने एक संदेश में कहा, "अत्यंत दुख और शोक के साथ सूचित किया जाता है कि न्यायमूर्ति महाबीर सिंह सिंधु का आज तड़के दो बजकर 50 मिनट पर निधन हो गया।"
न्यायमूर्ति सिंधु को 10 जुलाई, 2017 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद दो दिसंबर, 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। चार अप्रैल, 1967 को हरियाणा के हिसार जिले के मसूदपुर गांव के एक किसान परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति सिंधु ने वर्ष 1992 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।
उन्होंने मुख्य रूप से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दीवानी, आपराधिक, संवैधानिक तथा सेवा संबंधी मामलों की वकालत की।
साल 1999 में उन्हें उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्हें केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता बनाया गया। उन्होंने वर्ष 2004 से 2008 तक हरियाणा के उप महाधिवक्ता के रूप में भी सेवाएं दीं। सितंबर 2008 में उन्हें पंजाब का अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। वह दिसंबर 2009 तक इस पद पर रहे। इसके बाद दिसंबर 2009 में उन्हें हरियाणा का अतिरिक्त महाधिवक्ता बनाया गया। फरवरी 2013 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा देकर पुनः निजी वकालत शुरू की।
वर्ष 2016 में उन्हें पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के उच्च न्यायालय तथा अधीनस्थ अदालतों की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की समिति में शामिल किया गया। पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने न्यायमूर्ति सिंधु के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। संधवां ने एक बयान में उन्हें विधि जगत की विशिष्ट हस्ती और संवेदनशील न्यायविद बताते हुए कहा कि उनमें न्यायिक विषयों की गहरी समझ थी। उन्होंने कहा, "न्यायमूर्ति सिंधु के ऐतिहासिक फैसले तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और मानवीय गरिमा को बनाए रखने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता क्षेत्र की न्यायिक व्यवस्था पर अमिट छाप छोड़ेगी।"
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