जयपुर

राजस्थान की 40 लाख महिलाओं को आज से मिलेंगे फ्री मोबाइल फोन, राहुल गांधी ने किया योजना का आगाज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 10, 2023, 12:29 PM IST

Jaipur News: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीते साल इंदिरा गांधी मुफ्त स्मार्ट फोन योजना की घोषणा की थी। इसके तहत प्रदेश भर की महिलाओं को स्मार्ट फोन दिए जाने थे। अब जाकर इस योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत प्रदेश की कुल 1 करोड़ 40 लाख महिलाओं को मोबाइल फोन दिए जाने हैं।

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Rajasthan Free mobile Phones

Photo : BCCL

Jaipur News: राजस्थान की महिलाओं के लिए आज से मुफ्त में मोबाइल फोन वितरण शुरू हो जाएगा। राजस्थान की गहलोत सरकार की ओर से पहले चरण में प्रदेश की 40 लाख महिलाओं को फ्री मोबाइल फोन दिए जाएंगे। बुधवार को बांसवाड़ा दौरे पर आए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस योजना की शुरुआत की। उन्होंने महिलाओं को मुफ्त स्मार्ट फोन दिए। अब 10 अगस्त यानी आज से प्रदेश भर में स्मार्ट फोन का वितरण किया जाएगा।

बता दें, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीते साल इंदिरा गांधी मुफ्त स्मार्ट फोन योजना की घोषणा की थी। इसके तहत प्रदेश भर की महिलाओं को स्मार्ट फोन दिए जाने थे। अब जाकर इस योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत प्रदेश की कुल 1 करोड़ 40 लाख महिलाओं को मोबाइल फोन दिए जाने हैं। हालांकि, पहले चरण में सिर्फ 40 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा।

मोबाइल फोन पाने के लिए अलग-अलग कैटेगिरी

राजस्थान सरकार की ओर से मोबाइल फोन के लिए पात्र महिलाओं की अलग-अलग कैटेगिरी बनाई गई हे। पहले चरण में 40 लाख महिलाओं को फोन मिलने हैं। इसमें सबसे पहले उन परिवारों को फोन मिलेंगे, जिनकी बच्चियां 10वीं-12वीं या उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही हैं। दूसरी कैटेगिरी में वे महिलाएं हैं जो एकल नारी हैं और पेंशन पाने वाली महिलाएं भी इसमें शामिल हैं। मनरेगा में 100 दिन काम करने वाले परिवार भी इस कैटेगिरी की प्राथमिकता में हैं।

जन आधार कार्ड के जरिए मिलेगा स्मार्ट फोन

पहले चरण में मुफ्त स्मार्ट फोन प्राप्त करने लिए जन आधार कार्ड का प्रयोग करना होगा। अगर महिला मुखिया की मृत्यु हो चुकी है तो उसके 18 साल के बेटे या बेटी को फोन दिया जाएगा। सरकार की ओर से जिन्हें मुफ्त मोबाइल फोन दिया जाना है, उन्हें मैसेज भेजकर सूचित किया जा रहा है। सरकार की ओर से मोबाइल फोन के रजिस्ट्रेशन के लिए शिविर भी लगाए गए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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