जयपुर

सस्पेंड मेयर मुनेश गुर्जर को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की याचिका

निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर को उनके तीसरे निलंबन मामले में उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने मुनेश गुर्जर की याचिका को अस्वीकार करते हुए सरकार को आदेश दिया है कि वह विभागीय जांच को समय पर पूरा करे। इससे पहले शुक्रवार को...

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सांकेतिक फोटो (Istock)

जयपुर : पूर्व मेयर मुनेश गुर्जर को उनके तीसरे निलंबन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने गुर्जर की याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह विभागीय जांच को समय पर पूरा करे। गुर्जर ने अपने निलंबन को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार ने एकतरफा कार्रवाई की है और यह निर्णय राजनीतिक प्रेरणा से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।

दूसरी ओर, सरकार ने कहा कि गुर्जर को निलंबन से पहले सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उनके जवाब को असंतोषजनक पाया गया। गुर्जर के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, जिसके कारण उनका निलंबन उचित माना गया। गुर्जर ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले में दो जांच अधिकारियों को नियुक्त किया है, लेकिन एक अधिकारी का कोई पत्र नहीं मिला और दूसरे अधिकारी के पत्र पर कोई हस्ताक्षर नहीं थे।

सुनवाई के लिए निर्धारित तारीख सार्वजनिक अवकाश पर थी, और जब उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा, तो उन्हें अगले दिन ही निलंबित कर दिया गया। गुर्जर का कार्यकाल लगभग 13 महीने का रहा है, जिसमें उन्हें तीन बार निलंबित किया गया। पहले दो निलंबन आदेशों को राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, जबकि वर्तमान सरकार ने उन्हें 23 सितंबर 2024 को निलंबित किया।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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