जयपुर

Mahashivratri 2024: पहले बना ये शिव मंदिर...फिर बना जयपुर, जानिए इसका अद्भुत इतिहास

पिंक सिटी में कई प्राचीन और भव्य मंदिरें भी हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक है यहां स्थित ताड़केश्वर मंदिर। हर साल महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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जयपुर, ताड़केश्वर मंदिर

Photo : Twitter

Mahashivratri 2024: जयपुर अपनी कई ऐतिहासिक और खूबसूरत इमारतों को लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां के खूबसूरत हवामहल, सिटी पैलेस, जंतर मंतर में पूरे साल पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। इसके साथ ही पिंक सिटी में कई प्राचीन और भव्य मंदिरें भी हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक है यहां स्थित ताड़केश्वर मंदिर। हर साल महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। आइए जानते हैं जयपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास।

यह ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर महादेव को समर्पित है। यहां आपको राजस्थानी स्थापत्य संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। आप यहां अपने परिवार के साथ आराम से महादेव के दर्शन के लिए आ सकते हैं।

कैसे पड़ा मंदिर का नाम ?

ऐसा कहा जाता है कि जहां आज यह मंदिर स्थापित है, वहां बहुत समय पहले काफी मात्रा में ताड़ के पेड़ होते थे। एक बार ऐसा हुआ कि अंबिकेश्वर महादेव मंदिर के व्यास सांगानेर जाते समय यहां पर कुछ समय के लिए रुके। उन्होंने ही यहां पर शिवलिंग को सबसे पहले देखा था।

कैसे हुआ मंदिर का निर्माण ?

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण इस शहर की स्थापना के साथ ही किया गया था। पहले यहां एक छोटा स्वयंभू मंदिर बनाया गया था, जिसके बाद जयपुर के रियासत के वास्तुविद विद्याधर ने इस मंदिर को तैयार किया था।

शिवलिंग की स्थपना कैसे हुई ?

मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू बताया जाता है यानी इस इनकी स्थापना किसी ने नहीं की है। पहले ताड़केश्वर महादेव मंदिर को ताड़कनाथ के नाम से जाना जाता था। इस मंदिर से जयपुर वासियों की गहरी आस्था जुड़ी है। यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

मंदिर कैसे है जयपुर से पुराना ?

आमेर के महाराज जय सिंह द्वितीय ने साल 1727 में जयपुर की स्थापना की थी। उन्हीं के नाम पर शहर का नाम जयपुर पड़ा। कहा जाता है कि इसकी स्थापना से पहले से ही यहां शिवलिंग स्थापित है।

कहां ताड़केश्वर मंदिर ?

ताड़केश्वर मंदिर जयपुर शहर के चौड़ा रास्ता में एक मार्केट के बीचोंबीच स्थापित है। यहां इस मंदिर की काफी मान्यता है। यहां महाशिवरात्रि और सावन माह में भक्तों भीड़ जमा होती है। लोग यहां दूर-दूर से अपने परिवार संग दर्शन करने आते हैं।

सानव में उमड़ी है भक्तों की भीड़

वैसे तो ताड़केश्वर मंदिर में पूरे साल भक्तों का आना लगा रहता है। लेकिन सावन माह और महाशिवरात्रि पर यहां महादेव के दर्शन और जल चढ़ाने को लंबी लाइनें लगती हैं। सावन में सुबह तीन बजे से ही यहां भक्तों की भीड़ होती है।

कैसे पहुंत मंदिर ?

इस मंदिर के दर्शन आप बहुत ही आसानी से कर सकते हैं। यहां आप हवाई मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग से भी मंदिर पहुंच सकते हैं। सांगानेर हवाई अड्डे से आप कैब बुक कर सकते हैं या फिर यहां चलने वाली सिटी बस या लो फ्लोर बसे ले सकते हैं। आप जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से भी कैब या टैक्सी बुक कर मंदिर पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग के जरिए भी आसानी से यहां आ सकते हैं। जयपुर बस स्टैंड से आप मंदिर के लिए कैब ले सकते हैं।

Maahi Yashodhar
Maahi Yashodhar author

माही यशोधर Timesnowhindi.com में न्यूज डेस्क पर काम करती हैं। यहां वह फीचर, इंफ्रा, डेवलपमेंट, पॉलिटिक्स न्यूज कवर करती हैं। इसके अलावा वह डेवलपमेंट क... और देखें

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