जयपुर

Rajasthan: कोटा में NEET की तैयारी कर रही छात्रा ने खाया सल्फास, अस्पताल में मौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 18, 2023, 09:42 PM IST

Kota Suicide Case: उत्तर प्रदेश के मऊ की रहने वाली प्रियम सिंह कोटा में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। वह करीब डेढ़ साल से कोटा में रह रही थी। सोमवार को उसने सल्फास खा लिया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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कोटा में एक और छात्रा ने की आत्महत्या

Photo : BCCL

Kota Suicide Case: राजस्थान के कोटा शहर में एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा ने सल्फास खा लिया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, पुलिस अभी इस मामले को सुसाइड केस मानने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि छात्रा ने आत्महत्या की है।

घटना कोटा के विज्ञाननगर थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मऊ की रहने वाली प्रियम सिंह कोटा में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। वह करीब डेढ़ साल से कोटा में रह रही थी। घटना के पुलिस ने छात्रा के परिजनों को सूचना दे दी है, अधिकारियों का कहना है कि परिजनों के आने के बाद छात्रा के कमरे की जांच की जाएगी।

सुबह गई थी कोचिंग

जानकारी के मुताबिक, मृतक छात्रा सोमवार सुबह कोचिंग गई थी। हालांकि, करीब 3 बजे जैसे ही वह कोचिंग के बाहर निकली, उसे उल्टी होने लगी, जिसके बाद उसके साथियों ने कोचिंग संस्थान के कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। उसे तलवंडी इलाके के अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान आज शाम करीब 7 बजे उसकी मौत हो गई।

जनवरी से अब तक 25 स्टूडेंट्स ने किया सुसाइड

कोटा में स्टूडेंट्स सुसाइड के मामलों ने प्रशासन को हैरान कर कर रख दिया है। बता दें, यहां इस साल जनवरी से सितंबर तक 25 छात्रों ने आत्महत्या कर दी। सुसाइड के पीछे की वजह तनाव सामने आया है। इसके बाद राज्य सरकार भी इन मामलों को लेकर गंभीर नजर आ रही है। प्रशासन ने यहां कोचिंग संस्थानों को लेकर कई आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इसके बावजूद भी छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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