जयपुर

महिला ने खुद रची अपने अपहरण और गैंगरेप की कहानी, एक कॉल रिकॉर्डिंग से पुलिस ने खोल दी पूरी पोल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 10, 2023, 12:49 PM IST

Bhilwara Crime News: पुलिस ने रविवार को बताया कि 25 वर्षीय महिला दो पुरुषों के साथ स्वेच्छा से संबंध बनाने गई थी और विवाद तब हुआ जब उन्होंने उसे पूरी रात रुकने पर जोर दिया। महिला को डर था कि अगर उसके पति को इस बारे में पता चला तो वह उसे छोड़ देगा।

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राजस्थान के भीलवाड़ा में महिला के साथ गैंगरेप

Photo : BCCL

Bhilwara Crime News: राजस्थान के भीलवाड़ा से एक महिला के अपहरण और गैंगरेप का मामला सामने आया था। अब पुलिस की जांच में पता चला है कि यह मामला पूरी तरह से झूठा और फर्जी था, महिला ने खुद ही अपने अपहरण और गैंगरेप की कहानी बुनी थी। पुलिस ने इस बात का खुलासा दोनों आरोपियों से पूछताछ और फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर किया है।

पुलिस ने रविवार को बताया कि 25 वर्षीय महिला दो पुरुषों के साथ स्वेच्छा से संबंध बनाने गई थी और विवाद तब हुआ जब उन्होंने उसे पूरी रात रुकने पर जोर दिया। पुलिस के अनुसार महिला घर जाना चाहती थी लेकिन दोनों व्यक्तियों ने उस पर रुकने का दबाव डाला, जिसके बाद वह निर्वस्त्र अवस्था में घर से बाहर आई और एक राहगीर से मदद मांगी।

पुलिस को सुनाई थी मनगढ़ंत कहानी

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि महिला ने प्रारंभ में मनगढ़ंत कहानी सुनाई कि दो लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था और उसे एक सुनसान घर में ले जाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया, उसकी पिटाई की और उसके कपड़े ले लिए। अधिकारी ने कहा, महिला को डर था कि अगर उसके पति को इस बारे में पता चला तो वह उसे छोड़ देगा। इसलिए उसने मनगढ़ंत बात बताई।

सहमति से बनाए थे संबंध

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मोबाइल फोन में कॉल रिकॉडिंग से यह भी पता चला कि महिला ने शनिवार शाम को आरोपियों से बात की थी और पैसे लेकर उनके साथ जाने को तैयार हो गई थी। उन्होंने बताया कि महिला शनिवार रात छोटू सरगरा और गिरधारी से मिली और दोनों ने उसके साथ एक खाली मकान में सहमति से संबंध बनाए। पुलिस के अनुसार ओडिशा की रहने वाली महिला की शादी छह साल पहले एक बिचौलिए के माध्यम से भीलवाड़ा के एक 50 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति से हुई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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