जी हां, इस जगह को सोच से परे ही कहा जा सकता है। क्योंकि यहां के हालात बिल्कुल भी सामान्य नहीं होते हैं। सर्दियों में यहां का तापमान शून्य से भी 40 डिग्री नीचे चला जाता है। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ बर्फ की मोटी चादर बिछी नजर आती है। हर तरफ सफेद झाग सी नजर आती है।
दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह और भारत की सबसे ठंडी जगह का नाम है द्रास। जी हां, यह वही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल जिले में आने वाला द्रास है, जिसे अंग्रेजी में Drass लिखा जाता है।
द्रास दुनिया का ऐसा सबसे ठंडा स्थान है, जहां पर इंसानी बस्ती है। हिमालय की वादियों के बीच बसे द्रास की लोकेशन की बात करें तो यह श्रीनगर और कारगिल के बीच रास्ते में पड़ने वाली जगह है। एडवेंचर के शौकीनों के लिए द्रास स्वर्ग से कम नहीं है।
सर्दियों में द्रास का तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस दौरान यह ग्रामीण इलाका लगभग जम जाता है और यहां का आम जन-जीवन भी काफी स्लो हो जाता है। सब कुछ जैसे थम सा जाता है।
दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह द्रास, जो-जिला दर्रे के पास ही उसकी तलहटी में मौजूद है। सर्दियों में यहां के हालात जरूर बहुत कठिन होते हैं, लेकिन गर्मियों में यह एक बहुत ही मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन है।
अमरनाथ गुफा और सुरू वैली का ट्रैक द्रास से ही शुरू होता है। इसके अलावा यह गांव कारगिल युद्ध के समय मशहूर हुए टाइगर हिल और तोलोलिंग हिल के पास ही मौजूद है, जो यहां दे दिखाई भी देते हैं।
द्रास में मनमान टॉप भी मौजूद है, जहां से आप LOC देख सकते हैं। इसके अलावा आप ब्रिगेड वार गैलरी भी पहुंच सकते हैं, जहां पर कारगिल युद्ध के बारे में काफी जानकारी मौजूद है। इसी गांव में द्रास वार मेमोरियल भी मौजूद है। यहां पर कारगिल युद्ध के शहीदों की याद में स्मारक बनाया गया है।
द्रास को एक दूर-दराज का इलाका माना जाता है और इसका रिमोट एरिया में होना ही इसकी यूएसपी है। यहां पर कई छोटे-छोटे होमस्टे मौजूद हैं, जहां पर आपको गर्मागर्म बटर टी के साथ ही गर्मजोशी से भरी आवभगत देखने को मिलेगी।
अगर आप द्रास आना चाहते हैं तो आपको जून से सितंबर महीनों के बीच यहां आना चाहिए। क्योंकि इस दौरान यहां की सड़कें खुली रहती हैं और घाटियों में हरियाली भी अपने चरम पर होती है। सर्दियों में यहां बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है और एडवेंचर के शौकीन ही इस दौरान द्रास आना ज्यादा पसंद करते हैं।