Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर में सामने आया एक दिल दहला देने वाला हत्याकांड आखिरकार पुलिस ने सुलझा लिया है। सहारनपुर निवासी एक टैक्सी चालक ने अपनी प्रेमिका की बेरहमी से हत्या कर पहचान छुपाने के लिए उसका सिर धड़ से अलग कर दिया था। यह मामला पुलिस के लिए एक ब्लाइंड मर्डर बन गया था, लेकिन छह दिन की कड़ी मेहनत और तकनीकी जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या था पूरा मामला
यह सनसनीखेज वारदात 7 दिसंबर को प्रतापनगर थाना क्षेत्र के गांव बहादुरगढ़ के पास सामने आई थी। मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर एक युवती का शव मिला था, जिसकी हालत बेहद भयावह थी। शव से सिर गायब था और शरीर पर केवल ऊपरी कपड़े थे। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया था कि यह एक सुनियोजित और जघन्य हत्या है।
गठित हुई थी SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। डीएसपी रजत गुलिया के नेतृत्व में गठित इस टीम में सीआईए की टीमें और स्थानीय थाना पुलिस को शामिल किया गया। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतका की पहचान करना था। इसके लिए हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली गई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
आरोपी हुआ गिपरफ्तार
पहचान न होने के बावजूद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य इनपुट्स के आधार पर जांच जारी रखी। आखिरकार, शव मिलने के छह दिन बाद पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान फुरकान उर्फ बिलाल के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के टिडोली गांव का रहने वाला और पेशे से टैक्सी चालक है।
पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि मृतका उसके साथ पिछले दो वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। इस बीच उसकी शादी किसी दूसरी लड़की से तय हो गई थी। आरोपी का दावा है कि युवती उस पर शादी का दबाव बना रही थी और उसे डर था कि वह उसके परिवार को सच्चाई बता देगी। इसी आशंका में उसने प्रेमिका को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
आरोपी ने क्या बताया
आरोपी के मुताबिक, 6 दिसंबर की रात वह युवती को सहारनपुर से कार में लेकर निकला। पहले पोंटा साहिब में कमरा तलाशने की कोशिश की गई, लेकिन योजना बदलने के बाद बहादुरगढ़ के पास कार के अंदर ही हत्या कर दी गई। पहचान छुपाने के इरादे से उसने शव का सिर अलग कर अपने साथ ले गया और कपड़े भी हटा दिए, ताकि मृतका की पहचान मुश्किल हो जाए।
चूंकि युवती लंबे समय से परिवार से संपर्क में नहीं थी, इसलिए उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई थी। पहचान न हो पाने के कारण पुलिस ने नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार एक सामाजिक संस्था के माध्यम से कराया। हालांकि, अंतिम संस्कार के अगले ही दिन पुलिस ने इस जटिल हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली।
