गुरुग्राम

Gurugram: डीएलएफ फेज-2 के ओकवुड एस्टेट में गिरा स्लैब, 2 कारें क्षतिग्रस्त; निर्माण कंपनी ने किया खेल

गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-2 के ओकवुड एस्टेट में कंक्रीट स्लैब गिरने से दो कारें क्षतिग्रस्त हो गई। निर्माण कंपनी ने निर्माण के समय घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया है।

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ओकवुड एस्टेट में गिरा स्लैब

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

गुरुग्राम: डीएलएफ फेज-2 के ओकवुड एस्टेट में 20 फुट का कंक्रीट स्लैब भर भराकर ढह गया, जिसकी चपेट में आई दो कारें छतिग्रस्त हो गईं। हालांकि, कोई हताहत नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों ने निर्माण कंपनी को जिम्मेदार ठहराते है। कॉन्डोमिनियम के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने कहा कि गुरुवार शाम डीएलएफ फेज दो में ओकवुड एस्टेट कॉन्डोमिनियम के डी टॉवर में दो कारों पर 20 फीट लंबा और 2.5 फीट चौड़ा कंक्रीट स्लैब गिर गया। हालांकि, हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं। स्लैब कॉन्डोमिनियम में एक टावर के निर्माण का हिस्सा था।

ओकवुड एस्टेट में 300 फ्लैट

दरअसल, एमजी रोड के पास स्थित ओकवुड एस्टेट में 300 फ्लैट वाले चार टावर हैं। कॉन्डोमिनियम की देखरेख करने वाले ओकवुड एस्टेट कॉन्डोमिनियम एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि जो स्लैब गिरा है, उसमें मजबूत सामाग्री और सरिया आदि का कम थी। लिहाजा, यह हादसा हुआ था।

हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से विपिन यादव ने कहा कि हमने डीएलएफ के पास शिकायत दर्ज कराई है। उनसे संरचनात्मक ऑडिट करने को कहा है। फिलहाल, इमारत के विभिन्न हिस्सों में मरम्मत की है, लेकिन स्लैब के इस हिस्से को नहीं छुआ गया।

डीटीसीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। एमजी रोड के पास स्थित ओकवुड एस्टेट में 300 फ्लैट वाले चार टावर हैं। कॉन्डोमिनियम का निर्माण और विकास डीएलएफ द्वारा किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका रखरखाव स्थानीय निकाय ओकवुड एस्टेट कॉन्डोमिनियम एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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