ग्रेटर नोएडा

फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा जाने वाले यात्री ध्यान दें! अब जाम के झाम में नहीं फंसेंगे; खुशनुमा होगा सफर

अगर आप भी फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करते हैं और जाम में फंसकर दिमाग हिल जाता है, तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर आई है। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा की ओर एक नया पुल खुलने वाला है। जिसके जरिए आपकी यात्रा न सिर्फ तेज होगी, बल्कि आरामदायक भी होगी। यानी अब आपको जाम के झाम में फंसना नहीं पड़ेगा।

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फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा की यात्रा होने वाली है खुशनुमा।

दिल्ली एनसीआर के दो छोर फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा का सफर करने वालों के लिए जल्द शानदार सुविधा मिलने वाली हैं। अगर आप भी फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा जाने के लिए जाम में फंसने से तंग आ चुके हैं, तो आपको बड़ा तोहफा मिलने वाला है। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा को बेहतर बनाने के लिए एक नया पुल शुरू किया जाएगा। जिसके खुलने से दोनों शहरों के बीच की दूरी कम हो जाएगी।

फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा की यात्रा होगी आसान!

स्मार्ट सिटी फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा की ओर एक नया पुल खुलने वाला है, जो आपकी यात्रा को न केवल तेज़ बल्कि सुखद भी बना देगा। अब न जाम का झाम और न ही दूरी का आलस! इस पुल के खुलने से दोनों शहरों के बीच की दूरी कम हो जाएगी और आप बिना किसी परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। तैयार हो जाइए इस नई सुविधा के लिए!

जनता के लिए कब खुलेगा मंझावली पुल?

जानकारी के अनुसार पुल के बचे कार्यों को लोक निर्माण विभाग पूरा कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आम लोगों के लिए मंझावली पुल मार्च में खोला जाएगा। इस पुल का निर्माण यमुना नदी पर किया गया है। इस परियोजना पर करीब 122 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। चार लेन का यह पुल 630 मीटर लंबा है।

फरीदाबाद टू ग्रेटर नोएडा का सफर होगा आसान

हरियाणा के फरीदाबाद से उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को इस परियोजना के तहत बेहतर बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए 24 किलोमीटर लंबी परियोजना पर काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि मार्च में पुल के शुरू होगा, जिससे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने पर ट्रैफिक की समस्या से लोगों को काफी राहत मिलेगी। पिछले साल 15 अगस्त 2014 को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने पुल का शिलान्यास किया था। फरवरी 2018 में पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और अब इसे इसी वर्ष यानी मार्च 2025 में खोलने की तैयारी है।

सबसे खास बात तो ये है कि इस पुल के शुरू होने से दिल्ली-मुंबई और यमुना एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। अब लोगों को इंतजार है कि जल्द से ये पुल खुले और फरीदाबाद से ग्रेटर नोएडा की यात्रा सुगम हो जाए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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