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गुवाहाटी हवाई अड्डे पर 2,000 करोड़ खर्च करेगी सरकार, 2025 में खुलेगा नया टर्मिनल

असम के गुवाहाटी स्थित गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल के विकास के लिए सरकार 2000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसको अप्रैल 2025 में लोगों को सौंप दिया जाएगा।

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गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

Photo : BCCL

गुवाहाटी: अदाणी समूह द्वारा संचालित गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय (एलजीबीआई) हवाई अड्डे का नया टर्मिनल अप्रैल 2025 तक तैयार हो जाएगा। मुख्य हवाई अड्डा अधिकारी (सीएओ) उत्पल बरुआ ने को बताया कि 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत से बनाए जा रहे टर्मिनल को पहले दिसंबर 2024 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ‘डिजाइन’ में बदलाव के कारण इसमें करीब चार महीने की देरी हो गई।

50 वर्षों के लिए पट्टे पर देने की मंजूरी

उन्होंने कहा कि हमारा नया टर्मिनल अप्रैल 2025 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इमारत में और अधिक सुविधाएं शामिल करने के लिए ‘डिजाइन’ में किए बदलाव से थोड़ी देरी हुई है। हम इसे देश का सबसे प्रभावी टर्मिनल बनाना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2020 में अदाणी एंटरप्राइजेज को संचालन, प्रबंधन तथा विकास के लिए गुवाहाटी हवाई अड्डे को 50 वर्षों के लिए पट्टे पर देने की मंजूरी दी थी।

34 लाख यात्रियों का प्रबंधन

अक्टूबर 2021 में प्रबंधन को गुजरात स्थित इकाई को हस्तांतरित करने से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) नए टर्मिनल का विकास कर रहा था। बरुआ ने बताया कि नया टर्मिनल प्रति वर्ष 1.31 करोड़ यात्रियों का प्रबंधन कर पाएगा, जबकि मौजूदा टर्मिनल केवल 34 लाख यात्रियों का प्रबंधन कर पाता है। संरचना के विकास में निवेश के बारे में पूछे जाने पर बरुआ ने कहा कि पूरी सुविधा में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। इसमें से करीब 1,600 करोड़ रुपये टर्मिनल भवन में निवेश किए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि का इस्तेमाल एक नया ‘टैक्सीवे’ बनाने और ‘रनवे’ का विस्तार करने में किया जाएगा।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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