शहर

अहमदाबाद में छिपा था गोल्डी बरार गैंग का 'पिस्टल'! पुलिस ने दबोचा, पहले रह चुका है Contract Shooter

अहमदाबाद में Goldy Brar गैंग का कुख्यात शूटर 'पिस्टल' छिपा हुआ था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पहले Contract Shooter रह चुका है और कई वारदातों में शामिल रहा है।

Image

अहमदाबाद में छिपा था गोल्डी बरार गैंग का 'पिस्टल'

दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की तलाश के बीच गोल्डी बरार (Goldy Brar Gang) का कथित ऑपरेटिव आरिफ उर्फ ‘पिस्तोल’ पिछले चार-पांच दिनों से अहमदाबाद में रह रहा था। अस्थायी काम की तलाश में शहर पहुंचे आरिफ को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात Vejalpur से गिरफ्तार किया। उसकी तलाश में अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस भी शामिल थी।

लेकिन आरिफ की गिरफ्तारी के साथ उसकी कथित कांट्रैक्ट शूटिंग की कहानी भी सामने आई है। पुलिस ऑफिशियल्स के सीनियर सोर्स के मुताबिक मुताबिक, तिहाड़ और मुजफ्फरपुर जेल में रहने के दौरान एक साथी कैदी ने उसे Dubai-based शख्स के लिए कांट्रैक्ट शूटिंग का काम करने के लिए तैयार किया था।

जेल से Contract Shooter बनने तक

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद आरिफ ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में तीन Contract Firing Incidents को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, इन असाइंमेंट्स में आरिफ को सिर्फ टारगेट की लेकेशन दी जाती थी। उसे हवा में एक Round Fire करने का काम दिया जाता था।

Crime Branch अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आरिफ को टारगेट की पहचान या उसके बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी जाती थी। उसे सिर्फ Firing का काम करने के लिए पेमेंट किया जाता था।इन घटनाओं के बाद दिल्ली और यूपी पुलिस की टीमें आरिफ की तलाश में जुटी थीं।

Ahmedabad में तलाश रहा था अस्थायी काम

Senior अधिकारी ने टाइम्स नाउ नवभारत के साथ की हुई बातचीत के मुताबिक, आरिफ करीब चार-पांच दिन पहले अहमदाबाद पहुंचा था और यहां Temporary Work की तलाश कर रहा था।पुलिस के मुताबिक, वह अपने रहने के दौरान ऑटो रिक्शा चलाने की योजना बना रहा था।अधिकारियों ने गुजरात में किसी Local Individual को टॉरगेट करने की संभावना से इनकार किया है। आरिफ की Movement Ahmedabad Rural Police की Jurisdiction में भी ट्रेस हुई। इसके बाद Ahmedabad Rural SOG ने ऑपरेशन में शामिल होकर अपने इलाके में भी सर्च शुरू की।

Vejalpur में खत्म हुई तलाश

Multi-Jurisdiction Search के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने आरिफ को Vejalpur से गिरफ्तार किया।पुलिस के मुताबिक, आरिफ Attempted Murder, Firing और Extortion समेत 11 से ज्यादा Criminal Cases में वांटेड था। पुलिस ने आरोप लगाया कि आरिफ Goldy Brar Gang के लिए एक Operational Link के तौर पर काम करता था और Dubai के जरिए कथित तौर पर चलाए जा रहे High-Value Threat Calls और Extortion Rackets में उसकी भूमिका थी।

Investigators के मुताबिक, पुलिस से बचने के लिए आरिफ बार-बार अपने ठिकाने बदलता और अपनी पहचान छिपाता था।अब Joint Interrogation के जरिए पुलिस उसके कथित Local Accomplices, Financial Networks और Gang Activities में उसकी भूमिका की जांच कर रही है।

Contract Firing से Extortion Network तक

आरिफ की कथित भूमिका की जांच में दो अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। पहला, Delhi-NCR में तीन Contract Firing Incidents, जिनमें पुलिस के मुताबिक उसे सिर्फ Location दी गई और हवा में एक Round Fire करने को कहा गया। दूसरा, Goldy Brar Gang के कथित Extortion Network में उसका Operational Link के तौर पर काम करना।Crime Branch के मुताबिक, आरिफ को Contract Firing के दौरान Targets की पहचान या अन्य जानकारी नहीं दी जाती थी। उसे केवल Firing Task के लिए Payment किया जाता था।अब पुलिस उसके कथित संपर्कों और Financial Network की जांच कर रही है।

Goldy Brar Gang का कनेक्शन

Goldy Brar, जिसका असली नाम Satinderjit Singh है, को Investigating Agencies ने इंडिया और Overseas में सक्रिय एक Organised Criminal Network से जोड़ा है।दिए गए पुलिस इनपुट के मुताबिक, इस गैंग का संबंध Extortion, Targeted Killings, Arms and Drug Smuggling और शूटर की रिक्रूटमेंट से जोड़ा गया है। बरार उस समय सुर्खियों में आया था जब उसने 2022 में पंजाबी सिंगरसिद्धू मूसे वाला की हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। अहमदाबाद में आरिफ उर्फ ‘पिस्तोल’ की गिरफ्तारी के बाद अब जांच उसके कथित साथियों, Financial Network और गैंग में उसकी भूमिका पर केंद्रित है।

Dhruv Sanchania
ध्रुव संचानियाauthor

ध्रुव संचानिया गुजरात में टाइम्स नेटवर्क के सीनियर जर्नलिस्ट और ब्यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुव ने प्रिंट, रेडियो, डिजिटल और टीवी पर शानदार काम किया है। क्राइम, इन्वेस्टिगेशन से लेकर इंसानी कहानियों तक में उनका काम गहराई से भरा होता है। जब वह हेडलाइन के पीछे नहीं भाग रहे होते तो वह सड़कों, सिनेमा और अगली छिपी हुई कहानी के पीछे भाग रहे होते हैं। उनका काम ऐसा है जो उन्हें अलग ला खड़ा करता है।

और पढ़ें
End of Article