गाजियाबाद

दहेज के खिलाफ मिसाल बनी बागपत के रक्षित की सोच, लौटाया 21 लाख का चेक, लड़की पक्ष ने किया फैसले का सम्मान

Baghpat News: यूपी के बागपत जिले में एक सगाई समारोह में रक्षित राणा ने प्रेरणात्मक कदम उठाया। तिलक में लड़की पक्ष द्वारा दिए 21 लाख के चेक को उन्होंने सम्मान के साथ वापस किया और कहा कि वह शुरू से दहेज के विरोधी हैं और लोगों से इस परंपरा को हटाने में सहयोग की उम्मीद करते हैं। उनके इस फैसले से न केवल परिवार और लड़की पक्ष में बल्कि पूरे सोशल मीडिया पर वाहवाही हो रही है।

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दहेज के खिलाफ मिसाल बनी बागपत के रक्षित की सोच

Baghpat News: यूपी के बागपत जिले से एक बड़ी और प्रेरणा देने वाली खबर सामने आई है। जहां आज के समय में भी लोग दहेज ले रहे हैं या दहेज के लिए लड़की पक्ष को परेशान कर रहे हैं, वहीं जिले के बड़ौत शहर में रहे एक सगाई समारोह में दूल्हे ने साहसिक और समाज को प्रेरणा देने वाला कदम उठाते हुए तिलक के तौर पर आए 21 लाख रुपये के चेक को सम्मानपूर्ण वापस कर दिया। युवक के इस कदम से पूरे समाज में उसकी और परिवार की प्रशंसा की जा रही है। साथ ही इस कदम ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी लोगों के सामने रखा है।

बता दें कि यह मामला बड़ौत शहर कोतवाली क्षेत्र के वाजिदपुर गांव स्थित द ग्रैंड पैलेस रिसॉर्ट का है। यहां रक्षित राणा नाम के एक युवक की सगाई दिव्या नाम की युवती से हो रही थी। उस दौरान तिलक चढ़ाया गया, जिसमें लड़की पक्ष ने रक्षित को 21 लाख का चेक दिया। युवक ने सम्मानजनक इस चेक को लड़की पक्ष को वापस लौटा दिया।

रक्षित ने लौटाया 21 लाख का चेक

रक्षित ने इस कदम के पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका परिवार शुरू से ही दहेज प्रथा का विरोधी रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनका परिवार किसी भी प्रकार की आर्थिक भेंट या उपहार स्वीकार नहीं करता। रक्षित के अनुसार, विवाह दो परिवारों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित एक पवित्र संबंध है, और इस रिश्ते में देन-लेन जैसी कुरीतियों के लिए कोई जगह नहीं है। इसलिए तिलक के समय दिए गए चेक को तत्काल लौटा दिया गया। रक्षित ने दिव्या के परिवार से भी आग्रह किया कि वे भी समाज से इस प्रकार की अनावश्यक परंपराओं को समाप्त करने में सहयोग करें।

नई पीढ़ी की इस सोच का सम्मान

रक्षित के इस निर्णय का दिव्या के परिवार ने भी खुले दिल से सम्मान किया। दिव्या के पिता ने कहा कि रक्षित का यह कदम नई पीढ़ी की सोच और सही संस्कारों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चेक में दी गई राशि उन्होंने अपनी बेटी के भविष्य के लिए संजोकर रखी थी, लेकिन जब रक्षित और उनके परिवार ने दहेज स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया, तो इसे वापस लेना ही सही लगा। सगाई में मौजूद रिश्तेदारों और परिचितों ने रक्षित की इस कदम की जमकर सराहना की।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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