गाजियाबाद

गाजियाबाद में अंसल ग्रुप के खिलाफ Fir, धोखाधड़ी, विश्वासघात करने के आरोप; जानें क्या है माजरा

यूपी के गाजियाबाद में रियल एस्टेट डेवलपर अंसल ग्रुप के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई आरोपों में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई।

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(फाइल फोटो)

गाजियाबाद: गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में बुधवार को रियल एस्टेट डेवलपर अंसल ग्रुप के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई आरोपों में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के सहायक अभियंता ज्ञान प्रकाश द्विवेदी ने जिले के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

इनके खिलाफ एफआईआर

पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी में प्रणव अंसल, विकास यादव, अमित शुक्ला और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि बुधवार सुबह प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस आदेश के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी मामले में अंसल बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि घर खरीदारों को न्याय मिल सके।

आरोप है कि अंसल ग्रुप ने टाउनशिप नीति का उल्लंघन किया और (क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र) के डूंडाहेड़ा गांव में स्थित 99.75 एकड़ जमीन फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरे लोगों को बेच दी। मामले की जांच के लिए पुलिस की कई टीम गठित की गई हैं। मिश्रा ने बताया कि मंगलवार को अंसल ग्रुप के खिलाफ लखनऊ में कथित धोखाधड़ी, विश्वासघात, आपराधिक साजिश और संगठित अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को राज्य विधानसभा के अंदर भी रियल एस्टेट समूह का नाम लिया था, जिसमें उन्होंने विपक्षी समाजवादी पार्टी पर अपने शासनकाल के दौरान ऐसे बिल्डरों का पक्ष लेने का आरोप लगाया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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