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Ghaziabad News: अस्पताल में खुलेआम नशे का खेल, इंजेक्शन और सिरिंज बयान कर रहे पूरी कहानी

Ghaziabad News: यूपी के गाजियाबाद में जिला अस्पताल से कुछ हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें नशे के इंजेक्शन और सिरिंज का ढेर मिला है। इससे अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने मामले को लेकर जांच के आदेश दिए हैं।

Ghaziabad News: यूपी के गाजियाबाद जिले मुख्य जिला अस्पताल (MMG) से स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की नींद उड़ा देने वाली कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। जिले के जिस अस्पताल में लोग अच्छे इलाज की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, उस परिसर में नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा है। अस्पताल परिसर के टॉयलेट में भारी मात्रा में इस्तेमाल किए गए नशे के इंजेक्शन, खाली शीशियां और सिरिंज मिली हैं, जो अस्पताल की सुरक्षा और यहां हो रहे नशे के सेवन पर सवाल कर उठा रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह शौचालय CMS कार्यालय से मात्र 10-12 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस घटना के बाद अस्पताल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। नशा करने वाले लोगों ने इसे अपने ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करना जो शुरू कर दिया है। ये अस्पताल के स्टाफ, मरीज और उनके साथ आने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल बन रहा है।

अस्पताल के अंदर कैसे पहुंची दवाएं?

इस मामले के सामने आने के बाद सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि शौचालय में जो दवाएं और इंजेक्शन मिले हैं, उन्हें बिना किसी आधिकारिक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के खरीदना लगभग असंभव है। जानकारी के अनुसार, इन प्रतिबंधित दवाओं को रखने और मरीजों को देने के लिए बेहद सख्त नियम और रिकॉर्ड बुक का प्रावधान है। ऐसे में इन दवाओं का मिलना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अस्पताल के भीतर कहां से आई हैं? क्या ये दवाएं अस्पताल के स्टोर से चोरी की जा रही हैं? या फिर अस्पताल का ही कोई कर्मचारी इस अवैध खेल में शामिल है? सीनियर डॉक्टर बी.पी. त्यागी के अनुसार, इन दवाइयों का खुले में मिलना न केवल नशे की लत को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि यह अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।

बायो-मेडिकल वेस्ट नियमों की धज्जियां उठी

अस्पताल परिसर में खुलेआम फेंकी गई नीडल और इंजेक्शन की शीशियां बायो-मेडिकल वेस्ट नियमों का खुलेआम उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, मेडिकल कचरे को अलग-अलग कलर कोड के डिब्बों में सुरक्षित तरीके से फेंका जाना अनिवार्य है, ताकि इससे बीमारियां न फैलें। इन नियमों का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

बता दें कि खुले में इस प्रकार बिखरी ये सुइयां हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। CMS राकेश कुमार ने इस मामले में जांच की बात तो कही है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।

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Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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